'Newton' Movie Review : नूतन विचारों का न्यूटन

By: Inextlive | Publish Date: Fri 22-Sep-2017 01:10:33   |  Modified Date: Fri 22-Sep-2017 01:39:03
A- A+
'Newton' Movie Review : नूतन विचारों का न्यूटन
अच्छी फ़िल्म्स और अविस्मरणीय फ़िल्म्स में बस एक अंतर है, एक दिल को छू जाती है और दूसरी दिल में बस जाती है। न्यूटन एक ऐसी फिल्म है जो आपके दिल मे घर कर लेगी, आपकी सोच को नया आयाम देगी और आपको खिलखिलाने का प्रयास भी करेगी। इस हफ्ते कई फिल्में रिलीज हुई हैं, न्यूटन उनमें से सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म है।

कहानी
नूतन ने अपना नाम खुद बदल के न्यूटन रख लिया, नूतन विचारों वाला ये न्यूटन अपने को एक आदर्श व्यक्ति समझता है, समाज से हटकर। सोच और समाज को बदलने की चाह रखने वाला न्यूटन को एक इलेक्शन में पोलिंग के दौरान जीवन और समाज के कुछ और पाठ पढने को मिलते हैं, फिर क्या होता है जानने के लिए देखिये न्यूटन।

समीक्षा
ये साल निर्माताओं की सबक पे सबक सिखा के जा रहा है, बीते कुछ सालों में से ये बॉक्स ऑफिस पर सबसे रूखा साल है। जहां एक ओर बड़ी बड़ी फिल्मों को दर्शकों ने सिरे से नकार दिया वहीं दूसरी ओर छोटी छोटी अच्छी फिल्मों ने फ़िल्म जगत को राहत भले ही न दी हो पर क्लीशे और रेपेटेटिव प्लॉट पर बनी हुई फिल्मों से दर्शकों का ध्यान हटाया है। बरेली की बर्फी, शुभ मंगल सावधान और इस हफ्ते न्यूटन इस बात को साबित करती है,की अच्छी फिल्मों का एक अपना मार्किट बनता जा रहा है। हर लिहाज से न्यूटन एक बढ़िया फ़िल्म है। न्यूटन एक सामाजिक फ़िल्म है, एक युवा फ़िल्म है और एक मनोरंजक फ़िल्म भी है। ये फ़िल्म पिछली समय में देखी गई कुछ राजनीतिक फिल्मों की तरह देश बदलने का ढोंग नहीं करती, बस अपनी सोच सुधारने का इशारा देती है। फ़िल्म की कथा पटकथा बहुत ही उम्दा है, जिसकी वजह से हर एक किरदार केरीकेचर न होके रियल और अपने आस पास कहीं देखा हुआ लगता है। इस फ़िल्म की रायटिंग टीम को बधाई। फ़िल्म के कुछ सीन इतने अच्छे हैं कि आपको महीनों तक याद रहेंगे। फ़िल्म का आर्ट डायरेक्शन और साउंड डिज़ाइन भी काबिल ए तारीफ है। फ़िल्म की सिनेमाटोग्राफी अव्व्ल दर्जे की है।

 



थोड़ी बहुत जो कमी रह गई-
फ़िल्म की एडिट थोड़ी और चुस्त हो सकती थी, पर बाकी सब इतना अच्छा है कि बीच में कहीं कहीं अगर फिल्म स्लो हो जाती है तो आप उसे नज़र अंदाज़ कर सकते हैं।

अदाकारी
राजकुमार राव की वाह वाही करना अब रेगुलर होता जा रहा है, वो इस ज़माने के अमोल पालेकर हैं। अगर देखा जाए तो ये 'प्रीतम विद्रोही' के बाद उनका दूसरा अवॉर्डवर्दी परफॉर्मेंस है, या यूँ भी कहूँ  तो ग़लत नहीं होगा कि इस फ़िल्म के साथ वो राष्ट्रीय पुरुस्कारों में भी प्रबल दावेदार बनके उभरते हैं। अंजलि पाटिल जिन्होंने पिछली बार मिर्ज़या में अपने छोटे से रोल के लिए वाहवाही बटोरी थी, उन्होंने इस फिल्म में भी मन मोह लिया है। पर इन सबसे ज़्यादा अगर आप इम्प्रेस होंगे तो वो हैं संजय मिश्रा और पंकज त्रिपाठी के जानदार परफॉर्मेंस से।

कुल मिलाकर इस हफ्ते ऐसी कोई वजह नहीं कि आप इस फ़िल्म को छोडें और इसके एवज में इस हफ्ते रिलीज़ हुई कोई और फ़िल्म देखने जायें।

फ़िल्म का बॉक्स ऑफिस प्रेडिक्शन : 20-25 करोड़
रेटिंग : 4 स्‍टार

Yohaann Bhaargava
www.facebook.com/bhaargavabol

 

Bollywood News inextlive from Bollywood News Desk