- स्वाइन फ्लू और डेंगू पर आपकी बात कार्यक्रम में गेस्ट्स ने रखे विचार

मौसमी बीमारियों से निपटने को तैयार नहीं प्रशासन

-स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की कार्य-प्रणाली से असंतुष्ट

DEHRADUN : शहर में समय से पहले ही स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है. जिस तरह से अब तक अच्छी बारिश हुई है, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में डेंगू और चिकनगुनिया फैलने की भी पूरी आश्ाका है. नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग सफाई और लोगों को जागरूक करने की तो बातें कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. शहर में पिछले वर्षो तक अगस्त के बाद स्वाइन फ्लू के मरीजों का अस्पतालों में पहुंचने का सिलसिला शुरू होता था, लेकिन इस बार मध्य जुलाई तक ही चार लोगों की मौत की पुष्टि कर दी गई है और क्7 लोगों को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई है. डेंगू और स्वाइन फ्लू के इस खतरे के मद्देनजर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के कार्यालय में आप की बात कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भाग लेने वाले गेस्ट्स नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली से नाराज नजर आये.

सो रह है प्रशासन

स्वाइन फ्लू और डेंगू बरसात के दिनों में होने वाली बीमारियां हैं. पहले बरसात और उसके तुरन्त बाद फैलने वाली बीमारियों से बचाव के लिए गर्मियों में ही तैयारियां शुरू कर दी जाती थी. इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ. नगर निगम में दो-दो स्वास्थ्य अधिकारी हैं. पिछले साल डेंगू और स्वाइन फ्लू को लेकर सरकार ने जागरूकता रैलियां निकाली थी और दवाइयों का छिड़काव किया था. हमने खुद आरडब्ल्यूए के लोगों के साथ कई जगहों पर काम किया, लेकिन इस बार नगर निगम, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सब सोये हुए हैं.

-डॉ. महेश भंडारी, अध्यक्ष, दून रेजिडेंट्स वेलफेयर फ्रंट

अनधिकृत कॉलोनियों से बढ़ा खतरा

दून में जनसंख्या के दबाव और बड़े पैमाने पर बन रही अनधिकृत बस्तियों के कारण डेंगू और स्वाइन फ्लू का खतरा पैदा हो गया है. नेताओं ने अपना वोट बैंक तैयार करने के लिए कई बस्तियां बसा दीे हैं, लेकिन वहां सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है. इससे शहर गंदा होता जा रहा है, यहां भी स्थिति दिल्ली जैसी हो गई है, लगातार बढ़ती गंदगी से स्वाइन फ्लू और डेंगू जैसी बीमारियों का फैलना लाजमी हैं.

-शांति प्रसाद भट्ट, नेता उत्तराखंड क्रांति दल.

पहले तैयारियां होनी चाहिए

डेंगू और स्वाइन फ्लू अब हर साल फैलता है. क्या वजह है कि पहले से बचाव की तैयारियां नहीं की जाती. बरसात से पहले नालियों की सफाई होनी चाहिए. सब कुछ दिखावे के लिए हो रहा है और कमीशन खाने के लिए लोगों के स्वास्थ्य की किसी को चिन्ता नहीं है. पॉलीथिन का उदाहरण ले सकते हैं. दो-चार छापे मारते हैं फोटो खिंचवाते हैं, फिर सब बंद हो जाता है. नगर निगम अपने वर्तमान क्षेत्र की सफाई नहीं कर पा रहा है और म्0 और गांव निगम में मिलाने की सोच रहा है. निगम को पहले अपने क्षेत्र में फैल रही बीमारियों से निपटना चाहिए. यदि बीमारियां बड़े पैमाने पर फैलती हैं तो निगम को जिम्मेदार माना जाना चाहिए.

संजय भट्ट, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस

कूड़े के ढेरों पर भी छिड़काव नहीं

नगर निगम किस तरह शहर को गंदगी बांट रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जगह-जगह लगाये जाने वाले कूड़े के ढेरों पर भी दवा का छिड़काव नहीं किया जाता. इन ढेरों से होकर लोग आते-जाते हैं, जिससे बिमारियों का खतरा बना रहता है. शहर के बीचोंबीच बिंदाल का एक प्राइवेट स्कूल इसका उदाहरण है. स्कूल के बाहर हमेशा कूड़ा फैला रहता है, यहां से बच्चे आते जाते हैं, लेकिन इस कूड़े को न तो समय पर उठाया जाता है और न छिड़काव किया जाता है.

-वीरेन्द्र बिष्ट, सामाजिक कार्यकर्ता व उक्रांद नेता.

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बरसात में फैलने वाली बीमारियों से निपटने के लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं. फ्00 आशा वर्कर्स को सर्वे के काम में लगाया गया है. सर्वे का एक राउंड पूरा हो चुका है और अब दूसरा राउंड शुरू किया जा रहा है. स्वाइन फ्लू इस बार कुछ पहले आ गया है. इसके लिए सफाई व्यवस्था करने के लिए नगर निगम से कहा गया है. स्वाइन फ्लू और डेंगू से निपटने के लिए सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को विशेष हिदायतें दी गई हैं. इन संक्रामक बीमारियों के मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाये गये हैं. इन बीमारियों की दवाइयां सभी अस्पतालों में भिजवा दी गई हैं.

-डॉ. टीसी पंत, सीएमओ, देहरादून