अब थीसिस की नहीं हो सकेगी चोरी

By: Inextlive | Publish Date: Sat 13-Jan-2018 07:00:24
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अब थीसिस की नहीं हो सकेगी चोरी

- विवि ने तैयार किया एंटी प्लाग्रिजम सॉफ्टवेयर

- 18 फीसद कटेंट मैच होने पर रिजेक्ट होगी थीसिस

आगरा। डॉ। भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी में पीएचडी थीसिस को कॉपी पेस्ट करने से रोकने के लिए एंटी प्लाग्रिजम सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। शोधार्थी द्वारा थीसिस की एक कॉपी नेट पर अपलोड की जाएगी। थीसिस में सिमलियरटी मिलने पर साफ्टवेयर इसकी जानकारी देगा। जल्द ही इस व्यवस्था को यूनिवर्सिटी में लागू किया जाएगा.

सॉफ्टवेयर देगा जानकारी

विवि द्वारा थीसिस का पता लगाने के लिए एंटी प्लाग्रिजम सॉफ्टवेयर बनाया गया है। शोधार्थी द्वारा तैयार की गई थीसिस की एक कॉपी तैयार कर सॉफ्टवेयर पर अपलोड कर दी जाएगी। यदि, उक्त शोधार्थी की थीसिस 15 या 18 फीसद किसी अन्य शोधार्थी की थीसिस से मैच करती है, तो सॉफ्टवेयर द्वारा कॉपी पेस्ट की जानकारी दी जाएगी। इस पर संबंधित शोधार्थी से विभागाध्यक्ष द्वारा स्पष्टीकरण मांगा जा सकेगा। उचित स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर थीसिस रिजेक्ट भी की जा सकेगी.

विवाद से बचा जा सकेगा

शोधार्थी द्वारा संबंधित विषय पर थीसिस तैयार कर विभाग में समिट की जाती थी। इस दौरान अधिकतर कॉपी पेस्ट के मामले संज्ञान में आते थे। इससे अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती थी। सांइस को छोड़कर दूसरे सब्जेक्ट में कंटेंट मैच होने के कई मामले सार्वजनिक हो चुके हैं। लेकिन, कंटेंट की मानीटिरिंग नहीं हो पाती थी। तैयार किए गए सॉफ्टवेयर से थीसिस कॉपी पेस्ट होने की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। साथ ही शोधार्थियों में विवाद की स्थिति से भी बचा जा सकता है।

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