-अनदेखी पर बख्शे नहीं जा रहे अफसर

क्कन्ञ्जहृन्: लोगों की समस्याएं गंभीरता से नहीं लेने पर सरकारी अफसर नपने लगे हैं. लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत जन शिकायतों की अनदेखी करने वाले करीब चार दर्जन अफसरों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. आरोप सही पाए जाने पर उन्हें बर्खास्त भी किया जा सकता है. अबतक 174 अफसरों पर जुर्माना लग चुका है. जुर्माने के रूप में 4.80 लाख रुपए की वसूली हो चुकी है. इसके अंतर्गत अब तक 5 लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी भी आ चुके हैं. जिन 43 अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है, उनमें बीडीओ, सीओ, थानेदार, सहकारिता पदाधिकारी और प्रोग्राम अधिकारी शामिल हैं.

अतिक्रमण के मामले अधिक

फरियादियों की संख्या और शिकायतों की प्रकृति के हिसाब से माना जा रहा है कि बिहार में अधिक मामले भूमि अतिक्रमण के हैं. अधिनियम लागू होने के पौने दो वर्षो के दौरान विभिन्न स्तर पर ढाई लाख से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं. इनमें से 2.37 लाख शिकायतों का निपटारा हो चुका है. शेष के समाधान की प्रक्रिया जारी है. कुल प्राप्त शिकायतों में राजस्व और भूमि सुधार विभाग से संबंधित 20 हजार पांच मामले आए हैं. दूसरे नंबर पर इंदिरा आवास से जुड़े मामले हैं. इसकी संख्या 13992 है. इसी तरह जन वितरण प्रणाली और प?िलक के रोजमर्रे की जिंदगी से जुड़ी शिकायतें आ रही हैं.

60 दिन के अंदर करना है काम

जन साधारण की समस्याओं के सहज समाधान की कार्यसंस्कृति बनाने एवं 60 दिनों के भीतर शिकायतों के निवारण के लिए राज्य सरकार ने पांच जून 2016 को लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम लागू किया गया. लोक शिकायत केंद्रों पर रोज मिल रही शिकायतों और समाधान की गति को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि शासन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक जिम्मेदार है.