क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : झारखंड से हर 48 घंटे में एक बेटी लापता हो रही है. बेटियों के साथ ही राज्य की कानून व्यवस्था भी गायब होती दिखाई दे रही है. बेटियों के लापता होने के पीछे ह्यूमन ट्रैफिकर्स का हाथ होना माना जा रहा है. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष अबतक 130 बेटियां लापता हो चुकी हैं. इससे पहले 2015 में झारखंड से लड़कियों के गायब होने के 172 मामले दर्ज किए गए थे. यह आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं. बेटियों को ह्यूमन ट्रैफिकर्स से बचाने के लिए सीआईडी के अंडर में एक एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का गठन तो किया गया है, लेकिन लड़कियों के गायब होने का सिलसिला थम नहीं रहा है.

कई मामलों नहीं होती प्राथमिकी

झारखंड से लड़कियों के लगातार लापता होने के मामले राजधानी रांची से लेकर रिमोट एरिया तक से मिल रहे हैं. ज्यादातर बेटियों को नौकरी लगाने का झांसा देकर ह्यूमन ट्रैफिकर्स बड़े शहरों में ले जाते हैं और वहां उसका सौदा कर देते हैं. खास बात है कि अत्यंत पिछड़ों और सुदूर जंगलों के भीतर बसे गांवों की युवतियों को तस्करी करने के कई मामलों की प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हो पाती है.

निशाने पर होती हैं नाबालिग बच्चियां

ह्यूमन ट्रैफिकर्स के निशाने पर ज्यादातर नाबालिग बच्चियां होती हैं. स्टेट में इस साल दर्ज मामलों में 18 वर्ष से कम उम्र की बेटियों के गायब होने के 72 मामले दर्ज किए हैं जबकि 18 वर्ष से अधिक उम्र की 58 बच्चियां लापता हैं. इन बेटियों की स्थिति आज कैसी है, वह कहां हैं, क्या कर रही हैं, इसकी कोई जानकारी पुलिस के पास नहीं है.

आबादी 3 करोड़ से ज्यादा, पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट 8

झारखंड की आबादी करीब 3.25 करोड़ के लगभग है. इतनी बड़ी आबादी पर कंट्रोल के लिए राज्य में केवल 8 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का गठन किया गया ह. रांची जोन के सभी जिलों रांची का कोतवाली थाना, लोहरदगा टाउन थाना, गुमला टाउन थाना, सिमडेगा टाउन थाना, खूंटी टाउन थानापलामू सदर थाना, दुमका टाउन थाना, चाईबासा सदर थाना में यूनिट शुरु किया गया ह.