चिप्स के फूले हुए पैकेट में कौन सी हवा भरी होती है और क्‍यों? अगली बार खाने से पहले जान लेंगे तो अच्‍छा होगा!

By: Chandra Mohan Mishra | Publish Date: Mon 05-Feb-2018 06:19:06   |  Modified Date: Mon 05-Feb-2018 06:22:01
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चिप्स के फूले हुए पैकेट में कौन सी हवा भरी होती है और क्‍यों? अगली बार खाने से पहले जान लेंगे तो अच्‍छा होगा!
बाजार में बिकने वाले तमाम कंपनियों के चिप्स हम आप कभी ना कभी खरीदते ही रहते हैं, लेकिन उन्हें खरीदने के बाद ज्यादातर लोगों को खासतौर पर बच्चों को यह अफ़सोस होता है कि चिप्स का पैकेट देखने में जितना बड़ा दिखाई देता है खोलने के बाद उसमें से चौथाई मात्रा में भी चिप्स नहीं निकलते और निकलती है तो सिर्फ हवा। अब क्या आपने कभी सोचा है पैकेट के भीतर कौन सी गैस भरी होती है और फूड प्रोडक्‍ट के पैकेट में गैस भरने की आखिर जरूरत क्‍या है। ऐसा करने को किसी डॉक्‍टर ने कहा है या फिर कोई और ही लॉजिक है। आइए जानें फटाफट।

चिप्स के फूले हुए पैकेट में जब चौथाई मात्रा में चिप्स निकलते हैं तो हर कोई कहता है यार इसमें चिप्स कहां है, लेकिन कोई यह नहीं कहता कि इसके कौन सी हवा भरी है। अगर आप सोचते हैं कि वो ऑक्सीजन है तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, क्योंकि उस हवा का नाम है नाइट्रोजन। चिप्स के पैकेट के भीतर यह हवा क्यों भरी जाती है और उसका लॉजिक क्या है? तो बता दें कि इसके पीछे कई तरह के लॉजिक माने जाते हैं।

 

लॉजिक 1

चिप्स चाहे आलू के हों या किसी और चीज के, वो काफी पतले और नाजुक होते हैं। इस लॉजिक के मुताबिक अगर चिप्स के पैकेट में बिल्कुल भी हवा ना हो तो चिप्स आपस में टकरा कर बहुत जल्दी टूट जाएंगे। यानि जब आप पैकेट खोलेंगे तो आपको चिप्स नहीं बल्कि उसका चूरा मिलेगा। यह एक बड़ी वजह है कि चिप्स के पैकेट में हवा भरी जाती है। वैसे दुनिया की कई बड़ी कंपनियां चिप्स टूटने की प्रॉब्लम को कम करने के लिए ही अपने चिप्स पैकेट में नहीं बल्कि कैन में बेचती है, क्योंकि उसमें चिप्स ज्यादा समय तक साबुत बने रहते हैं।

 

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लॉजिक 2

यह लॉजिक काफी हद तक साइंटिफिक है। साइंस के मुताबिक ऑक्सीजन सभी गैसों में सबसे ज्यादा एक्टिव नेचर की गैस है यह जहां भी होती है, किसी भी चीज या प्रोडक्ट के मॉलिक्यूल्स यानी उसके अणुओं के साथ बहुत जल्दी घुलमिल जाती है। खाने की चीजों के मामले में यह प्रक्रिया और भी ज्यादा तेज होती है। ऐसे में ऑक्सीजन के कारण किसी भी चिप्स के पैकेट में बैक्टीरिया पनप सकते हैं। यह हम आप देखते ही हैं कि खुली रखी हुई किसी चीज में कीटाणु बहुत जल्दी पर पनपने लगते हैं। यह एक बड़ी वजह है कि चिप्स के पैकेट में ऑक्सीजन नहीं बल्कि नाइट्रोजन भरी जाती है। तमाम गैस में से नाइट्रोजन सबसे कम रिएक्टिव है, इस कारण नाइट्रोजन की उपस्थिति में कई तरह के कीटाणु पनप या बढ़ नहीं पाते। यही नहीं नाइट्रोजन की वजह से चिप्स मुलायम नहीं होते बल्कि क्रिस्पी बने रहते हैं। यह बात एक रिसर्च में साबित हो चुकी है कि खाने की चीजों को क्रिस्पी बनाए रखने में नाइट्रोजन काफी कारगर है।

 

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लॉजिक 3

यह लॉजिक ग्राहकों की सोच या उनकी प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर सेट किया गया है। सालों से हम आप जब भी कोई सीलबंद खाने का पैकेट खरीदते हैं तो हम उम्मीद करते हैं कि उसके भीतर नमी नहीं होगी और उसमें मौजूद चीज काफी क्रिस्पी और क्रंची होगी।

 

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लॉजिक 4

अगर चिप्स के पैकेट में हवा ना भरी जाए तो कस्टमर को यह पता नहीं चलेगा कि चिप्स का पैकेट कहीं से खुला हुआ या लीक तो नहीं है। फिलहाल फूला हुआ पैकेट साबित करता है कि चिप्स का पैकेट पूरी तरह से सील पैक्‍ड है।

 

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लॉजिक 5

यह लॉजिक भी इंसानी सोच की वजह से ही बना है। ज्यादातर चिप्स कंपनियां अपने पैकेट में बहुत कम मात्रा में चिप्स रखती हैं, अब अगर चिप्स का पैकेट फूला हुआ नहीं होगा तो कस्टमर को लगेगा कंपनी उनके साथ धोखा कर रही है या फिर इतनी ज्यादा कीमत में इतने कम चिप्स दे रही है। इसलिए ह्यूमन साइकोलॉजी को ध्यान में रखकर कंपनियां चिप्स के हर एक पैकेट में जमकर नाइट्रोजन भर देते हैं ताकि कस्‍टमर पैकेट देखकर खुश हो जाए और उसे खरीदने के लिए प्रेरित हो।

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