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स्‍कर्ट पहनकर पर्दे पर आने वाली पहली अभिनेत्री थीं 'अम्‍मा'

राजनीति में कमबैक क्‍वीन नाम से मशहूर तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जयललिता आखिरकार जिंदगी की जंग से हार गईं। सोमवार देर रात अपोलो अस्‍पताल में 'अम्‍मा' का निधन हो गया। तमिलनाडु सहित पूरे देश में उनके समर्थक शोक में डूबे हुए हैं। राजनीति में दशकों तक लोगों का सबसे प्रिय चेहरा रहीं जयललिता की जिंदगी का सफर आसान न था। तो आइए जानें उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ महत्‍वपूर्ण बातें....

Tue 06-Dec-2016 11:58:23
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जयललिता का जन्म 24 फ़रवरी 1948 को एक 'अय्यर' परिवार में, मैसूर राज्य (जो कि अब कर्नाटक का हिस्सा है) के मांडया जिले के पांडवपुरा तालुक के मेलुरकोट गांव में हुआ था।
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उनकी प्रारंभिक शिक्षा पहले बंगलौर और बाद में चेन्नई में हुई। चेन्नई के स्टेला मारिस कॉलेज में पढ़ने की बजाय उन्होंने सरकारी वजीफे से आगे पढ़ाई की।
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महज 2 साल की उम्र में ही उनके पिता जयराम, उन्हें माँ संध्या के साथ अकेला छोड़ कर चल बसे थे। पिता की मृत्यु के पश्चात उनकी मां उन्हें लेकर बंगलौर चली आयीं, जहां उनके माता-पिता रहते थे। बाद में उनकी मां ने तमिल सिनेमा में काम करना शुरू कर दिया और अपना फिल्मी नाम 'संध्या' रख लिया।
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जब वे स्कूल में ही पढ़ रही थीं तभी उनकी मां ने उन्हें फिल्मों में काम करने के लिए राजी कर लिया। विद्यालई शिक्षा के दौरान ही उन्होंने 1961 में 'एपिसल' नाम की एक अंग्रेजी फिल्म में काम किया। मात्र 15 वर्ष की आयु में वे कन्नड फिल्मों में मुख्‍य अभिनेत्री की भूमिकाएं करने लगी। कन्नड भाषा में उनकी पहली फिल्म 'चिन्नाडा गोम्बे' है जो 1964 में प्रदर्शित हुई। उसके बाद उन्होने तमिल फिल्मों की ओर रुख किया। वे पहली ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्होंने स्कर्ट पहनकर भूमिका निभाई थी।
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तमिल सिनेमा में उन्होंने जाने माने निर्देशक श्रीधर की फिल्म 'वेन्नीरादई' से अपना करियर शुरू किया और लगभग 300 फिल्मों में काम किया। उन्होंने तमिल के अलावा तेलुगु, कन्नड़, अँग्रेजी और हिन्दी फिल्मों में भी काम किया है। उन्होंने धर्मेंद्र सहित कई अभिनेताओं के साथ काम किया, किन्तु उनकी ज्यादातर फिल्में शिवाजी गणेशन और एमजी रामचंद्रन के साथ ही आईं।
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जयललिता ने एक इंग्‍लिश फिल्‍म 'Epistle' में भी काम किया था। यह फिल्‍म साल 1961 में रिलीज हुई थी। इस फिल्‍म को पूर्व राष्‍ट्रपति वीवी गिरी के बेटे शंकर गिरी ने निर्देशित किया था।
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जयललिता को कई भाषाएं बोलनी आती थीं। वह अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, कन्‍नड़ और हिंदी बोल लेती थीं। यही नहीं उन्‍हानें अपनी कई फिल्‍मों में खुद ही गाना गाया है।
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फिल्‍म इंडस्‍ट्री छोड़ने के बाद जयललिता को एआईएडीएम के संस्थापक एम. जी. रामचंद्रन ने 1980 में पार्टी का प्रचार सचिव नियुक्त किया था। जिसके बाद 1984 में वह पहली बार राज्यसभा सांसद बनीं। वर्ष 1989 में पहली बार उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीता।
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नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्होंने 25 मार्च, 1989 को हुई उस घटना के बाद सदन में नहीं जाने का फैसला किया जब उनकी साड़ी खींच ली गई थी और उस समय द्रमुक एवं अन्नाद्रमुक के सदस्यों के बीच धक्कामुक्की में द्रमुक अध्यक्ष एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री करूणानिधि का चश्मा टूट गया था। उस वक्त जयललिता ने संकल्प लिया था कि वह मुख्यमंत्री बनने पर ही विधानसभा में लौटेंगी।
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जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद जयललिता पहली बार साल 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। 2011 के विधानसभा चुनाव जयललिता को 234 में से 217 सीटों पर जीत मिली। जिसके बाद वह तीसरी बार मुख्यमंत्री बनी थीं।
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जयललिता आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल जा चुकी है। लगभग सात महीने बाद कर्नाटक उच्च न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनको बरी कर दिया था।
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जयललिता भले ही दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं। लेकिन उनकी यादें हमेशा बनी रहेंगी।

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