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ऐसे कैसे मिलेगी शिक्षा

मौजूदा प्रदेश सरकार ने सत्ता में आने के बाद शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए पूरे प्रदेश में मॉडल स्कूल बनाने की घोषणा की थी. इसी के तहत राजधानी के मोहनलालगंज तहसील के करोरा गांव में समाजवादी अभिनव स्कूल (मॉडल स्कूल) का निर्माण तीन साल पहले शुरू हुआ. 2016 से इन स्कूलों में पहले सेशन की शुरुआत होनी थी. लेकिन, बिना निर्माण कार्य पूरा कराए ही नए सेशन की शुरुआत करा दी गई. और तो और, तीन महीने बीतने के बाद अभी तक स्कूल में बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुïिवधाएं नहीं हैं. इतना ही नहीं, बच्चों के बैठने के लिए बेंच और स्टूल तक नहीं हैं, वो बोरे पर बैठकर पढ़ते हैं. सवाल ये है कि जब राजधानी में तीन करोड़ की लागत से बने मॉडल स्कूल में ये असुविधाएं और लापरवाही है तो पूरे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सरकार कैसे सुधारेगी. ये हाल तब हैं जबकि मंडल के सभी मॉडल स्कूल्स में एडमिशन होना बाकी हैं.

Wed 06-Jul-2016 12:41:55
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इन बच्चों की आंखों में दिखती है शिक्षा की ललक
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क्लास में बोरे में बैठकर पढते हैं स्टूडेंट़स
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टीचर के पास डस्टर तक नहीं, कागज से साफ करते हैं ब्लैक बोर्ड
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पीने के पानी के लिए घडे के भरोसे रहते हैं बच्चे
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क्योंकि नल पडे हैं सूखे, नहीं आता है पानी
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तखत पर लगता है कार्यालय, घूमते रहते हैं कुत्ते
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मॉडल स्कूल के बाहर भरा रहता है पानी
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यह हाल है मोहनलालगंज के करोरा में तीन करोड की लागत से बने मॉडल स्कूल का