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आग बरस रही है या धूप है भइया

क्या शहर, क्या गांव, गर्मी से हर जगह के लोग बेहाल हैं. सुबह आठ बजते ही आग सी तपती हुई धूप लोगों को झुलसा रही है. धूप की जल को देखते हुए ज्यादातर लोग घरों में रहना मुनासिब समझ रहे हैं. घरों से बाहर वही लोग निकल रहे हैं जिनके बहुत जरूरी काम हैं. मार्केट हो या सड़कें दोपहर के समय सन्नाटा में रहती ही हैं. धूप से बचने के लिए हर युवक गमछे से मुंह बांध कर निकल रहे हैं, तो वहीं युवतियां दुपट्टे से मुंह व सिर को अच्छी तरह ढके हुए ही सड़कों पर नजर आती हैं. कॉलेज व स्कूल और दफ्तरों के लिए निकले तमाम युवा जगह-जगह गन्ने का रस, कोल्डड्रिंक, उबले और भुने हुए आम से बना रस, पानी, बेल आदि का सरबत पी कर प्यास बुझाने को मजबूर हैं. इतना ही नहीं तमाम लोग परिवार के साथ शहीद उद्यान पार्क में पहुंच कर पेड़ों के नीचे दोपहर बिता रहे हैं. गर्मी को देखते हुए लोग कूलर खरीदने को मजबूर हो गए हैं.

Sat 22-Apr-2017 06:29:20
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'नींद न जानै ठांव कुठांवÓ दोपहर के समय पेड़ के छांव में नींद आई तो तरबूज पर ही सो गया ब्यापारी.
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दोपहर के समय गुरुवार को हाईकोर्ट रोड पर धूप की वजह से पसरा सन्नाटा.
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धूप से बचने के लिए दुपट्टे से सिर व चेहरा बांध कर कॉलेज जाती छात्राएं.
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धूप में निकलते ही सिर व चेहरे पर दुपट्टा बांधती महिला.
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धूप से बचने के लिए बारिश का छाता लेकर घरों से निकलीं महिलाएं.
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धूप से बचने के लिए सिर व मुंह को बाध कर बाइक से सफर करती युवतियां.
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दोपहर के समय गर्मी में शहीद उद्यान पार्क में समय बिताने पहुंचे के लिए परिवार साथ पहुंचे लोग.
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धप से बच्चों को बचाने का जतन करती महिला.
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गमछे से सिर व मुंह को बांध कर सफर करते युवक.
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धूप में दुपट्टे से मुंह बांध कर कॉलेज जाती स्कूटी सवार छात्राएं.
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बड़ी तेज धूप है, दुपट्टा बांध ही लेते हैं.