2030 तक भारत होगा 100% इलेक्ट्रिक वाहनों वाला दुनिया का पहला देश

By: Shweta Mishra | Publish Date: Sat 26-Mar-2016 03:18:02
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 2030 तक भारत होगा 100% इलेक्ट्रिक वाहनों वाला दुनिया का पहला देश
अगले 15 वर्षों में भारत सौ फीसद इलेक्ट्रिक वाहनों वाला दुनिया का पहला देश बन सकता है। केंद्र सरकार की इसे मुकम्मल बनाने की तैयारी है। इसके लिए सरकार के भीतर बैटरी चालित कारों के लिए जीरो डाउन पेमेंट वाली स्कीम लाने पर काम चल रहा है।

रुपये का निवेश नहीं
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने युवाओं के एक कार्यक्रम में मोदी सरकार की इस विजनरी योजना का संकेत दिया। इससे न सिर्फ प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी, बल्कि महंगे जीवाश्म ईंधनों के आयात पर निर्भरता भी खत्म हो जाएगी। उद्योग चैंबर सीआईआई की ओर से शुक्रवार को आयोजित यंग इंडिया कार्यक्रम में गोयल ने कहा, 'भारत साल 2039 तक इतने बड़े आकार वाला पहला ऐसा देश बन सकता है, जहां सिर्फ बैटरी चालित वाहन रहेंगे। हम इस कार्यक्रम को सेल्फ फाइनेंसिंग बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें इसकी मदद के लिए सरकार की ओर से एक रुपये भी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देशवासियों को भी इसके लिए एक रुपये का निवेश नहीं करना पड़ेगा।' इस मौके पर वह अपनी इस योजना को और विस्तार में बताने से भी नहीं चूके।

इसकी किस्तें भर सकते
इतना ही नहीं उनका कहना है कि हम स्कीम पर काम कर रहे हैं। हम ऐसी बैट्री चालित कार मुफ्त में (जीरो डाउन पेमेंट पर) दे सकते हैं। लोग पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद पर होने वाली बचत से इसकी किस्तें भर सकते हैं। इनोवेशन संभव है। बस इसके लिए खुले दिमाग से विचार करने की जरूरत है। आपको इसके बड़े पैमाने के बारे में सोचना होगा और ईमानदारी बरतनी पड़ेगी।'गोयल ने सूचित किया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अगुआई में एक छोटा कार्यसमूह पहले ही गठित किया जा चुका है। इसमें तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर शामिल हैं। अप्रैल के पहले सप्ताह में इस समूह की बैठक होने जा रही है। इसमें देश को 2030 तक सौ फीसद इलेक्ट्रिक वाहनों वाला बनाने पर विचार किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, 'हम बड़े पैमाने के बारे में विचार कर रहे हैं।

अगुआई करने की सोच रहे

दुनिया के पीछे चलने की बजाय अगुआई करने की सोच रहे हैं। भारत इतने बड़े पैमाने पर सोचने वाला पहला देश होगा।'उन्होंने इसे व्यावहारिक साबित करने के लिए एलईडी बल्बों का उदाहरण भी दिया। कहा कि बड़े पैमाने पर खरीद के जरिये इनकी आसमान छूती कीमतों को सरकार जमीन पर ला चुकी है। फरवरी, 2014 में एक एलईडी बल्ब की कीमत 310 से कम नहीं थी। वहीं, अब यह कीमत घटकर 64 रुपये प्रति बल्ब के आसपास आ चुकी है। इसके लिए बीते साल ही मोदी सरकार ने डोमेस्टिक एफिशिएंट लाइटिंग प्रोग्राम शुरू किया था। इसके तहत बिजली वितरण कंपनियों के जरिये परिवारों को अब तक 8.32 करोड़ एलईडी बल्ब दस रुपये की मामूली मासिक किस्त पर उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

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