सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. विश्राम को पाकिस्तानी नंबर से आई धमकी के मामले में पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया है मगर जांच आगे नहीं बढ़ सकी है. कारण यहां भी सीमा विवाद ही है. हालांकि यह सीमा विवाद थानों की नहीं बल्कि विदेशी है. पुलिस को इसके लिए इंटरपोल की मदद लेनी है जो बेहद लंबी और जटिल प्रक्रिया है.

बना रखा है दहशत का माहौल

क्राइम ब्रांच सूत्रों की मानें तो पाकिस्तानी नंबर से धमकी मिलने के ऐसे दर्जनों मामले हैं जो अनरिपोर्टेड रह जाते हैं. कुछ लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं तो कुछ डर के मारे शिकायत ही नहीं करते. क्राइम ब्रांच यह भी मानती है कि इन नंबरों से कॉल आने के पीछे लोकल नेटवर्क ही जिम्मेदार है. कई मामलों में विदेशों से मंगाए गए सिमकार्ड का भी इस्तेमाल किया गया है मगर साइबर सेल लोकेशन के आधार पर इन्हें ट्रेस कर पकड़ लेती है.

क्या करें अगर कॉल आए तो

एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह बताते हैं कि ऐसे नंबरों से कॉल आने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें. ताकि पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां इनकी छानबीन कर सकें. नंबरों पर हुई बातचीत को यथासंभव रिकॉर्ड करें. हालांकि सबसे बेहतर तरीका ऐसी कॉल्स को अवॉयड करने का ही है.

कार्रवाई की यह है प्रक्रिया

+92 कोड यानी पाकिस्तान के नंबर से आने वाली कॉल्स की लोकेशन के अलावा पुलिस का साइबर सेल कुछ भी पता नहीं लगा सकती. इसका पता लगाने का जिम्मा एटीएस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का है. केंद्रीय एजेंसियां मामले की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजती हैं, मंत्रालय इसे इंटरपोल और इंटरपोल उसे संबंधित देश की पुलिस या अन्य एजेंसियों को भेजता है. पाकिस्तान या दूसरे देश की एजेंसियों पर निर्भर करता है कि वह कितनी फुर्ती से इस टास्क को वर्कआउट करती हैं.

पाकिस्तानी या अन्य विदेशी नंबरों से आने वाले कॉल्स की जांच प्रक्रिया में केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग लेना पड़ता है. फिर भी ऐसी कॉल्स आने पर लोगों को डरने की जरूरत नहीं, वह पुलिस से शिकायत करें.

दिनेश कुमार सिंह, एसपी सिटी वाराणसी

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