रामनाथ कोविंद : एनडीए के राष्‍ट्रपति उम्‍मीदवार के बारे में जानें उनकी बहन से

By: Abhishek Tiwari | Publish Date: Tue 20-Jun-2017 10:50:05
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रामनाथ कोविंद : एनडीए के राष्‍ट्रपति उम्‍मीदवार के बारे में जानें उनकी बहन से
रामनाथ कोविंद के राष्‍ट्रपति उम्‍मीदवार बनते ही उनके शहर कानपुर में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। यहां उनकी मुंहबोली बहन गीतांजलि रहती हैं। उन्‍होंने कोविंद के बारे में बहुत कुछ बताया। तो आइए जानते हैं कौन हैं रामनाथ कोविंद और कैसे चर्चा में आया उनका नाम...

कानपुर में हुआ जन्‍म
राम नाथ कोविन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला), तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। कोविन्द का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है। वकालत की उपाधि लेने के पश्चात दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत प्रारम्भ की। वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। उन्होनें संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा भी तीसरे प्रयास में ही पास कर ली थी।

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वर्तमान में हैं बिहार के राज्‍यपाल
8 अगस्त 2015 को रामनाथ कोविंद को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। वर्तमान में वह इसी पद पर कार्यरत हैं। बीजीपे द्वारा कोविंद जी को राष्‍ट्रपति पद का उम्‍मीदवार घोषित करने से विपक्षी हैरान है। खैर वह राष्‍ट्रपति बनेंगे या नहीं इसका फैसला 22 जुलाई को हो जाएगा।

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12 साल तक रहे राज्‍यसभा सांसद
साल 1991 में भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हो गए। वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा सदस्‍य निर्वाचित हुए। पहला कार्यकाल पूरा करने के बाद 2000 में पुनः उत्तरप्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। इस प्रकार कोविन्द लगातार 12 वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य रहे। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे। श्री कोविन्द का नाम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 19 जून 2017 को एनडीए के सर्वसम्मत राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में घोषित किया।

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मुंहबोली बहन ने सुनाई उनकी कहानी
कानपुर के मैकरॉबर्टगंज की लाल इमली कॉलोनी में हर दिन जैसा सामान्य माहौल था। किसी को कोई खबर नहीं। मगर, शाम करीब छह बजे स्‍थानीय निवासी जागेश्वर सिंह वहां पहुंचे और बस्ती वालों को बताया कि रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बनने वाले हैं। तब तक प्रतिक्रिया लगभग सामान्य थी, क्योंकि ये उस पीढ़ी के लोग थे, जिनसे कोविंद का कोई सीधा नाता नहीं रहा। मगर, जब जागेश्वर सिंह ने बंद पड़े जर्जर झोपड़ीनुमा घर की तरफ इशारा करके बताया कि इसी घर में अपनी बहन-बहनोई के साथ कोविंद बचपन में रहते थे। यहीं से बीएनएसडी इंटर कॉलेज में पढऩे जाते थे। बस, फिर क्या था। देश की खास खबर इस बस्ती के लिए भी चंद सेकंड में बेहद खास हो गई। महिला-बच्चे, पुरुष सबकी जुबां पर कोविंद ही कोविंद।

जिस घर में रहते थे, वो हुआ जर्जर
तभी जागेश्वर सिंह आगे बढ़े और चारपाई पर लेटी लगभग सौ वर्ष की अपनी मां गीतांजलि से बोले- 'अम्मा सेवा भगत का साला रामनाथ याद है? वृद्धा सहारा लेकर बैठीं और हैरानी से बोलीं- हां, रामनाथ। क्या हुआ उसे? आया है क्या? उन्हें बेटे ने बताया कि आए नहीं हैं, वह देश के राजा बनने वाले हैं। इतना सुनते ही वृद्ध गीतांजलि की आंखें छलछला उठीं। बगल वाले घर की ओर इशारा कर बोलीं- यहीं तो रहता था।

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एक बार बस्ती में आ जाएं
जागेश्वर सिंह ने बताया कि उनकी मां गीतांजलि रामनाथ कोविंद की मुंहबोली बहन हैं। कोविंद जब यहां रहते थे, तब के समय के और लोग अब यहां नहीं हैं। बस्ती वाले उन्हें मामा पुकारते थे। उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद भी उनसे कई बार किसी न किसी पारिवारिक समारोह में मुलाकात हुई तो उन्होंने बस्ती और मुंहबोली बहन के बारे में पूछा जरूर, लेकिन यहां आए कभी नहीं। अब बस्ती वाले चाहते हैं कि एक बार यहां जरूर आएं।

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