- पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में विभिन्न विभागों के कर्मचारी रहे आंदोलन पर

- लोग करते रहे बाबुओं का इंतजार, तीन बजे के बाद ऑफिसों में शुरू हुए कार्य

GORAKHPUR: पदोन्नति में आरक्षण के विरोधस्वरूप चल रहा सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन पब्लिक को भारी पड़ गया। आंदोलन में मंगलवार को बिजली विभाग, लोक निर्माण विभाग, जल निगम, सिंचाई विभाग, नगर निगम सहित आधा दर्जन विभागों के कर्मचारी शामिल हुए। सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक कर्मचारियों ने सभा की और उसके बाद दो बजे तक ऑफिस पहुंचे तो लंच टाइम हो गया। इस दौरान जरूरी कामों से सरकारी दफ्तरों में पहुंचे लोग कर्मचारियों के ना होने से काफी परेशान रहे। इसके बाद दोपहर तीन बजे तक कर्मचारी सीटों पर बैठे जिसके बाद कार्य शुरू हो सका।

पब्लिक रही हलकान

कर्मचारियों के विरोध के बीच मंगलवार को पब्लिक को काफी मुसीबत झेलनी पड़ी। इस दौरान सरकारी विभागों में कार्य से पहुंच रहे लोगों को एक ही जवाब मिल रहा था कि बाबू दो बजे के बाद आएंगे। शहर के ज्यादातर सरकारी विभागों के ऑफिस में यही हाल था। कोई हाउस टैक्स को लेकर परेशान था तो कोई बिजली विभाग के ऑफिस में अपने कार्य के लिए दौड़ रहा था।

अड़े हैं कर्मचारी

इस संबंध में सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के चेयरमैन शैलेंद्र दूबे ने कहा कि केंद्र सरकार पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन करने जा रही है। गोरखपुर सहित पूरे प्रदेश में इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि आगामी विधान सभा चुनाव में जो पार्टी हमारी मांग के विरोध में जाएगी, सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के सदस्य और उनके परिवार उसका विरोध करेंगे। इस दौरान मुख्य रूप से सर्वेश शुक्ला, डीके सिंह, अरविंद सप्रे, सत्य प्रकाश सक्सेना, जेबी राय, आरसी पांडेय, एके सिंह, चंद्रशेखर चौरसिया, प्रदीप दूबे, अजीत त्रिपाठी, महेंद्र मिश्रा, वाईके चतुर्वेदी आदि लोग उपस्थित रहे।

कॉलिंग

मेरे यहां का हाउस टैक्स गड़बड़ था, जिसे सही करने की जानकारी लेने आया था। पता चला कि जो बाबू हैं वह आंदोलन में गए हैं, दोपहर दो बजे के बाद आएंगे। अब यही लग रहा है कि दिवाली के बाद ही यह कार्य हो पाएगा।

- वैभव जायसवाल, प्रोफेशनल

बिजली विभाग में पिछले दो दिन से चक्कर लगा रहा हूं। एक्सईएन ने हस्ताक्षर कर दिए थे, आज कार्य होना था। लेकिन कर्मचारी ही आंदोलन में चले गए, जिस कारण आज भी मीटर की रीडिंग वेरीफाई नहीं हो पाई।

सोनू निगम, व्यापारी