केस क्

गंवानी पड़ी जान

इज्जतनगर डिवीजन के उझानी-बितरोई रेलवे स्टेशन के बीच ब् जनवरी को रेल हादसे में दो गैंगमैन मारे गए थे. उनमें से एक हसीब नाम का गैंगमैन भी था. जो कि बरेली सिटी स्टेशन का स्टॉफ था. कर्मचारी कम होने से बदायूं सेक्शन में गए थे.

केस ख्

नहीं खोला फाटक

ख् मई ख्0क्7 को भोजीपुरा और इज्जतनगर स्टेशन के बीच गेट संख्या ख्फ्ब् सी पर तैनात गेटमैन ने फाटक बंद कर दिया तो दोबारा नहीं खोला. क्योंकि, उस दिन उससे 8 घंटे के बजाय क्म् घंटे ड्यूटी कराई जा रही थी.

<द्गठ्ठद्द>

केस 3

टैंकर से टकरा गई ट्रेन

25 अक्टूबर 2017 को बरेली पीताम्बरपुर के पास राज्यरानी एक्सप्रेस तेल से भरे टैंकर से टकरा गई थी. स्टेशन मास्टर ने फाटक बंद करने की सूचना नहीं दी थी. फाटक खुला होने से वाहनों का आवागमन चलता रहा. तभी ट्रेन एक टैंकर से टकरा गई. जिसमें टैंकर चालक की मौत भी हो गई थी.

<केस फ्

टैंकर से टकरा गई ट्रेन

ख्भ् अक्टूबर ख्0क्7 को बरेली पीताम्बरपुर के पास राज्यरानी एक्सप्रेस तेल से भरे टैंकर से टकरा गई थी. स्टेशन मास्टर ने फाटक बंद करने की सूचना नहीं दी थी. फाटक खुला होने से वाहनों का आवागमन चलता रहा. तभी ट्रेन एक टैंकर से टकरा गई. जिसमें टैंकर चालक की मौत भी हो गई थी.

BAREILLY:

BAREILLY:

रेल दुर्घटनाओं में हर साल होने वाली मौत के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर का खराब रख रखाव और अपग्रेडेशन न होना तो जिम्मेदार है ही इसके अलावा इसका एक और बड़ा कारण बड़ी संख्या में सेफ्टी स्टाफ की कमी है. सेफ्टी कैटिगरी में ख्भ् फीसदी कर्मचारियों का पद अब तक खाली है. वर्तमान समय में वर्क कर रहे फ् हजार कर्मचारियों के कंधों पर खाली पद के कर्मचारियों की ड्यूटी का भी जिम्मा है. अधिक वर्क से थकावट में चूर कर्मचारी अपने काम को ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं. उनसे कहीं न कहीं चूक हो जाती है जिसका नतीजा रेल हादसे के रूप में सामने आ रहा है. कहीं कर्मचारी अपनी जान गंवा रहे हैं, तो कहीं रेल हादसे से यात्रियों की जान पर बन आती है. फ् दिन पहले ही पेट्रोलिंग के दौरान ख् गैंगमैन की ट्रेन के चपेट में आने से मौत हो गई थी.

सेफ्टी का ध्यान नहीं

सेफ्टी एंप्लॉयीज में ट्रैकमैन, पॉइंटमैन, पैट्रोलमैन, टेक्निशंस और स्टेशन मास्टर शामिल हैं. वे ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होते हैं. एक्सप‌र्ट्स के मुताबिक, सेफ्टी स्टाफ की कमी यात्रियों के जीवन को खतरे में डालती है. बड़ी संख्या में सेफ्टी स्टाफ की कमी होने से मौजूदा वर्कर्स को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. उनको एक दिन में क्भ् घंटे से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे गलती की संभावना बनी रहती है. डिजाइनर, यूनिफॉ‌र्म्स और और ब्रैंडिंग की अन्य कवायद में रेलवे तो दिल खोलकर खर्च करता है लेकिन जब सुरक्षाकर्मियों के खाली पदों को भरने की बात आती है तो सांप सूंघ जाता है.

क्भ् घंटे से अधिक ड्यूटी

यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि एक दिन में ट्रैकमैन, गेटमैन से क्भ् से क्म् घंटे ड्यूटी ली जा रही है. कर्मचारियों की कमी के चलते पेट्रोलिंग पर दो की बजाय एक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है. किसी के बीमार पड़ जाने या हाई मेंटेनेंस के दिन उनको इससे भी ज्यादा समय तक काम करना पड़ता है. एक ट्रैकमैन को औसतन क्भ्-क्7 किलोग्राम वजन का उपकरण ढोना पड़ता है, और चाहे सर्दी हो या तपती गर्मी का मौसम काम करना पड़ता है. हमें मौसम के कहर से कोई राहत नहीं मिलती. जबकि, नियम के मुताबिक, एक कर्मचारी से 8 घंटे से अधिक ड्यूटी नहीं ली जा सकती है.

रेलवे में संरक्षा से जुड़े कर्मचारियों की भारी कमी हैं. खाली पदों को भरने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को लिखा जा चुका है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. कर्मचारियों ने एक्स्ट्रा ड्यूटी कराई जा रही है. जिससे हादसे होने का डर रहता है.

विवेक मिश्रा, मंडल मंत्री, एनई रेलवे मैन्स कांग्रेस, इज्जतनगर डिवीजन