क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रांची 'ड्रग्स का ट्रैफिक सेंटर' बनता जा रहा है. यहां ड्रग्स का सेवन करने वालों की तादाद जहां तेजी से बढ़ रही है, वहीं अन्य शहरों में धड़ल्ले से इसकी सप्लाई भी की जा रही है. नशीली दवाओं का ये कारोबार पूरे शहर में फैल चुका है. कई मेडिकल स्टोरों में चोरी -छिपे बिक रही ऐसी नशीली दवाएं युवाओं के साथ साथ बच्चों तक आसानी से पहुंच रही है.

छात्रों तक हो रही सप्लाई

नशीली दवाओं के धंधे से जुड़े लोगों का कहना है कि उनके निशाने पर युवाओं के साथ स्कूल-व कॉलेजों के स्टूडेंट्स होते हैं. उन्हें उनके बताए ठिकानों पर ड्रग्स व नशीली दवाएं पहुंचाई जाती है. इतना ही नहीं, मेडिकल स्टोर में नवयुवक नशा करने के लिये सस्ते दवाईयां व इंजेक्शन मांगते हैं , सभी दवाईयों को मिलाकर नशे की डोज बनाकर उसे लेते हैं व नशे का इंजेक्शन का प्रयोग करते हैं.

इन ड्रग्स व नशीली दवाओं की है डिमांड

गांजा, चरस, स्मैक के अलावा कई तरह के केमिकल ड्रग्स की डिमांड युवाओं के बीच सबसे ज्यादा है. इसके अलावा हेरोइन, स्पार्मा प्रोक्सिवोन, फेंसीड्रिल और कोरेक्स सिरप, नूपहिन, एक्टिवैन, एलएसडी के अलावा कोरेक्स जैसी नशीली दवाओं का इस्तेमाल भी ज्यादा किया जा रहा है.

कहां-कहां बिकता है कोरेक्स

रिम्स परिसर स्थित दवा दुकान, बरियातू की दुकान, डोरंडा, हिनू, अरगोड़ा, चुटिया, सुखदेवनगर के रातू रोड, कोतवाली एरिया के अपर बाजार इलाके में कोरेक्स धड़ल्ले से बेचा जा रहा है.

रिनपास में आ रहे हर दिन कई केसेज

रिनपास के सीनियर रेजिडेंट डॉ सिद्धार्थ सिन्हा के मुताबिक, नशे की वजह से मनोरोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सिर्फ रिनपास में ही हर दिन तीन-चार ऐसे मामले आ रहे हैं, जिसमें नशे के कारण उनकी दिमागी हालत बिगड़ी है. इसमें वैसे मनोरोगियों की संख्या ज्यादा है, जो ब्राउन सुगर, डेंड्राइट और कोरेक्स जैसे नशीली दवाओं का इस्तेमाल करते हैं. इतना ही नहीं, इंजेक्शन के जरिए नशा लेने वालों की तादाद भी तेजी से बढ़ रही है.