गजब! बकरी चराकर की पढ़ाई, जीता डॉ एलपी विद्यार्थी गोल्ड मेडल

By: Inextlive | Publish Date: Tue 14-Nov-2017 05:04:10   |  Modified Date: Tue 14-Nov-2017 05:06:29
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गजब! बकरी चराकर की पढ़ाई, जीता डॉ एलपी विद्यार्थी गोल्ड मेडल
एंथ्रोपोलॉजी में डॉ एलपी विद्यार्थी गोल्ड मेडल जीतनेवाले अरुण कुमार मुंडरी की कहानी फर्श से अर्श तक का सफर तय करनेवाले नौजवान की कहानी है.

RANCHI:  चाईबासा के बुनुमदा गांव निवासी अरुण ने बताया कि बचपन में उनकी चाहत थी कि वे सेंट जेवियर स्कूल और सेंट जेवियर कॉलेज में पढ़ाई करें, पर गरीबी के कारण उनका यह सपना साकार नहीं हो सका. पिता उस समय बेरोजगार थे, तो प्राथमिक शिक्षा दिन में बकरी चराते हुए गांव की रात्रि पाठशाला में पूरी की. बाद में गांव के ही बोया मिडिल स्कूल में पांचवीं तक की पढ़ाई की. गांव के ही स्कूल से दसवीं करने के बाद रांची कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और एंथ्रोपोलॉजी में टॉपर बना. अरुण ने बताया कि गरीबी से लड़ने का एक ही रास्ता है और वह अधिक से अधिक शिक्षा हासिल करना है. ख्8 साल के अरुण पीएचडी करके प्रोफेसर बनना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि फील्ड कोई भी हो मेहनत से ही सफलता मिलती है.

 

 

पति लॉयर, पिता लॉयर और खुद लॉ की टॉपर

-जोया ताज तंजीम को मिला गोल्ड मेडल

मेरे पिता लॉयर हैं, पति भी लॉयर हैं और मैं भी इसी प्रोफेशन में करियर बनाना चाहती थी. इसलिए मेहनत और लगन से पढ़ाई की और रांची यूनिवर्सिटी में लॉ की टॉपर बनी. सोमवार को गोल्ड मेडल और अपने 9 महीने के बेटे हादी को थामे जोया ताज तंजीम ने बताया कि वह बचपन से ही टॉपर रही हैं. गुरुनानक स्कूल से दसवीं करने के बाद उन्होंने क्ख्वीं कॉमर्स से पूरी की. घर में अधिकतर लोग लॉ के प्रोफेशन से जुड़े हैं, तो वह भी कॉमर्स से स्विच करके लॉ में आ गई. उन्होंने बताया कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता यदि सफलता चाहिए तो आपको मेहनत करनी ही होगी. जोया के पति नकी अख्तर भी लॉयर हैं और जोया को टॉपर बनाने में उन्होंने भी अपना योगदान दिया. जोया के पिता सैयद अहमद सैफ भी सिटी के फेमस लॉयर हैं और लड्डू बाबू के नाम से जाने जाते हैं.

 

 

पढ़ाई के साथ घर भी संभाला

-पीजी टीआरएल की टॉपर निर्मला उरांव को मिला गोल्ड मेडल

पीजी टीआरएल की टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट निर्मला उरांव की कहानी भी संघर्ष के बीच से सफलता का प्रतिमान गढ़ने की है. लोहरदगा के तिसिया डुमरटोली निवासी निर्मला ने बताया कि उनके सामने घर चलाते हुए पढ़ाई करने की चुनौती थी. जब बेटे आयुष उरांव का जन्म हुआ तो यह चुनौती और बढ़ गई. पर पढ़ाई और घर की जिम्मेवारी में संतुलन बनाते हुए रोज चार घंटे पढ़ाई की. विषय को गंभीरता से समझा और नतीजा गोल्ड मेडल के रूप में निकला. निर्मला ने बताया कि वह पीएचडी करके प्रोफेसर बनना चाहती हैं और अपने गांव में शिक्षा के प्रति जागृति लाना चाहती हैं. निर्मला ने कुड़ुख विषय लेकर पढ़ाई की और टीआरएल में टॉपर बनीं.