मंहगाई दर हुई कंट्रोल
आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिये रिजर्व बैंक दस हफृते नीतिगत दरों में एक चौथाई परसेंट की और कटौती कर सकता है. हालांकि इस कटौती के पीछे सबसे मुख्य कारण है, मंहगाई दर घटना. एक ओर जहां मंहगाई दर कंट्रोल में है, तो वहीं दूसरी ओर कोल इंडिया के रिकॉर्ड विनिवेश से राजकोषीय स्थिति बेहतर दिख रही है. बताते चलें कि केंद्रीय बैंक अपनी छठी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा 3 फरवरी को पेश करेगा.

0.25 परसेंट की कटौती से बाजार उछला
रिजर्व बैंक ने पिछले महीने रेपो रेट में 0.25 परसेंट की कटौती कर बाजार को सुखद आश्चर्य में डाल दिया था. 20 महीने तक कड़ा रुख अपनाने के बाद RBI ने पहली बार रुख को नरम किया. बैंकरों व अर्थशास्त्रियों के अनुसार खुदरा और थोक मंहगाई दर के नीचे आने से रिजर्व बैंक के पास ब्याज दरों में और कमी की गुंजाइश बनी है. कोल इंडिया में विनिवेश के जरिये सरकार के खजाने में 22,577 करोड़ रुपये आए हैं. इससे राजकोषीय मोर्चे पर चिंता कम हुई है. रिजर्व बैंक ने पिछले माह रेपो दर को आठ से घटाकर 7.75 फीसद करते हुए कहा था कि ब्याज दरों में और कटौती मुद्रास्फीति के रुख और राजकोषीय स्थिति पर निर्भर करेगी.

5 परसेंट हुई मंहगाई दर
खुदरा महंगाई दर दिसंबर में घटकर 5 परसेंट पर पहुंच गई है, वहीं थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई की दर शून्य के आसपास बनी हुई है. अधिक विनिवेश के साथ सरकार की राजकोषीय स्थिति के और सुधरने की उम्मीद है. चालू वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश से 43,425 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के प्रमुख अनिमेष चौहान का कहना है कि अधिकांश व्यापक आर्थिक संकेतक ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में हैं. उन्हें उम्मीद है कि RBI के गवर्नर तीन फरवरी को ब्याज दरों में चौथाई फीसद की और कटौती कर सकते हैं. सार्वजनिक क्षेत्र की आइएफसीआइ केएमडी मलय मुखर्जी ने कहा, 'रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरों में कटौती को लेकर व्यापक उम्मीदें जताई जा रही हैं. रिजर्व बैंक के पास सभी आंकडे़ हैं. वह उन्हीं के अनुरूप फैसला लेगा.

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