आलू की फैक्‍ट्री लगाने की बात करने वाले राहुल गांधी भोले हैं या नादान

By: Inextlive | Publish Date: Mon 19-Jun-2017 01:21:00
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आलू की फैक्‍ट्री लगाने की बात करने वाले राहुल गांधी भोले हैं या नादान
आज कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी का जन्‍मदिन है। ऐसे में हम उनके कुछ बयानों का जिक्र कर रहे हैं जिनकी वजह से वे या तो विवादों में रहे या मजाक का निशाना बने। इन 10 बयानों को पढ़ कर आप बताइये कि आपकी नजर में राहुल गांधी क्‍या हैं

बयान नंबर 1- हम आलू की फैक्‍ट्री नहीं लगवा सकते क्‍योंकि हमारी सरकार नहीं है। मैं तो विपक्ष का नेता हूं। (उत्‍तर प्रदेश, 2016)

बयान नंबर 2- जिस की सत्‍यता भी थोड़ी विवादित है, क्‍योंकि विपक्ष कहता है कि राहुल नारियल के जूस का जिक्र कर रहे थे जबकि कांग्रेस कहती है ये झूठ है तो पाइनएप्‍पल जूस की बात कर रहे थे।  ( 28 फरवरी,  2017)

बयान नंबर 3- मेरे पास ऐसे भ्रष्टाचार की जानकारी है, जिसका खुलासा अगर कर दूं तो राजनीति में भूकंप आ जाएगा, वो जानकारी है कहां। (2017)
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बयान नंबर 4- बीजेपी सांसदों को मंहगाई का नहीं पता क्‍योंकि वो सब्‍जी लेने मंडी नहीं जाते। (लोकसभा 2016)

बयान नंबर 5- 'मुज़फ़्फ़रनगर में आग लगी है। ऐसे 10-15 लड़के हैं, मुसलमान लड़के हैं, जिनके भाई-बहनों को मारा गया है। पाकिस्तान के लोग उनसे बात कर रहे हैं। पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी के लोग उन लड़कों से बात करना शुरू कर रहे हैं और मैं, उनसे बात कर रहा हूं, कह रहा हूं कि इनके बहकावे में मत आओ।' ( 24 अक्टूबर, 2013)

बयान नंबर 6- 'जो लोग आपको मां-बहन कहते हैं, मंदिर जाते हैं, देवी को पूजते हैं वही बस में महिलाओं को छेड़ते हैं'। ( राजीव गांधी की जयंती, 2013)
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बयान नंबर 7- 'दलितों को ऊपर उठने के लिए धरती से कई गुना ज्यादा बृहस्पति ग्रह की 'इस्केप वेलोसिटी' जैसी ताकत की जरूरत है'। (9 अक्टूबर, 2013 )

बयान नंबर 8- 'गरीबी सिर्फ एक मानसिक स्थिति यानी दिमागी हालत है और इसका खाना खाने, रुपये और भौतिक चीजों से कोई वास्ता नहीं है'। (6 अगस्त, 2013)

बयान नंबर 9- 'मेरे लोगों ने मुझे कहा कि भारत चीन की तुलना के चक्कर में मत पड़ो लेकिन मैं उनकी बात नहीं मानता। देखिए दो तरह की व्यवस्थाएं हैं, एक केंद्रीकृत और दूसरी विकेंद्रीकृत। चीन में केंद्रीकृत व्यवस्था है, उसे ड्रैगन कहा जाता है।" वह साफ़ दिखता भी है. वह बड़ा है, ताकतवर है। लोग हमें हाथी कहते हैं। ड्रैगन के सामने तुलना करने के लिए, लेकिन हम हाथी नहीं है। हम मधुमक्खी का छत्ता हैं। यह मज़ाक की बात लगती है लेकिन इस बारे में सोचिए। कौन ज़्यादा ताकतवर है हाथी या मधुमक्खी का छत्ता? दोनों की ताकत बिल्कुल अलग ढंग से काम करती है। हमें समझना होगा कि हम क्या हैं? हमारी ताकत कहां से आती है?' (4 अप्रैल, 2013)
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बयान नंबर 10- 'एक बार मेरा परिवार कुछ करने का फ़ैसला कर ले तो उससे पीछे नहीं हटता. चाहे यह भारत की आज़ादी हो, पाकिस्तान का बंटवारा या फिर भारत को 21वीं सदी में ले जाने की बात हो।' (16 अप्रैल, 2007)

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