सुस्ती में चल रहे रियल स्टेट सेक्टर से अगले साल क्या उम्मीदें है?

पिछले समय में इस सेक्टर ने काफी कुछ झेला है। इंप्‍लॉयमेंट जेनरेशन के मामले में यह दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है। खराब वक्त से गुजरते हुए इसके साथ जुड़ी कई कनेक्टिंग इंडस्ट्री की ग्रोथ पर भी असर पड़ा। रियल स्टेट की ग्रोथ को कम करने के लिए एक के बाद एक कई चीजें हुई, लेकिन अब पिछले कुछ समय में हुए बदलावों का सकारात्मक असर दिख सकता है। आम बजट में भी सरकार रियल स्टेट सेक्टर के सपोर्ट में उसे इंसेटिवाइज करने के साथ ही लैंड एक्वीजिशन, फाइनेंसिंग से जुड़े मुद्दों पर राहत देगी, ऐसी उम्मीद है।

सेक्टर में किस तरह के बदलाव देख रहे हैं?

सरकार का जोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा है, लेकिन इसी के साथ रियल इस्टेट सेक्टर पर भी ध्यान देना होगा। रियल स्टेट सेक्टर में तेजी आए इसके लिए लोन पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर छूट के साथ टैक्स स्ट्रक्चर को बेहतर बनाना होगा।यह सेक्टर पहले से ही टैक्स के दायरे में है। और बड़ा टैक्स कॉन्ट्रीŽयूशन भी करता है। कानपुर की ही बात करें तो यहां जितने अफोर्डेबल हाउसिंग के प्रोजेक्ट्स हैं उतने ही टाउनशिप ग्रुप हाउसिंग के प्राइवेट प्रोजेक्ट्स भी चल रहे हैं। सरकार को भी यह समझ में आ गया है कि रियल स्टेट सेक्टर की ग्रोथ से अच्छा खासा इंप्‍लायमेंट जेनरेट हो सकता है। इसलिए उम्मीद है कि आने वाले बजट में इस बात का ध्यान रखा जाएगा।

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कानपुर में रियल स्टेट सेक्टर की ग्रोथ को किस तरह देखते हैं?

एनसीआर रीजन की तरह कानपुर में सिस्टमैटिक प्‍लानिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट नहीं हुआ। इसलिए रियल स्टेट सेक्टर की ग्रोथ भी सिटी के कुछ ही एरियाज में अच्छी हुई है। अब विकास नगर से लेकर बिठूर, मंधना में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जा रहा है। तो यहां कई बड़े बिल्डर्स अपने प्रोजेक्ट्स ला रहे हैं। आनंद बिल्डर भी बिठूर, मैनावती रोड के पास एक आनंद सैफ्रॉन सिटी नाम से बड़ा प्रोजेक्ट लांच करने की तैयारी में है। जिसमें होटल से लेकर पार्टीलॉन, रेजीडेंशल एरिया, कॉमर्शियल स्पेस से लेकर हॉस्पिटल व नैचुरोपैथी जैसी सेवाएं शुरू की जाएंगी। कानपुर में इंफ्रास्ट्रक्चर की ग्रोथ में केडीए का भी बड़ा योगदान है। पिछले कुछ समय में केडीए की वर्किंग में बड़े बदलाव आए हैं जोकि बिल्डर्स और बॉयर्स दोनों के लिए सकारात्मक हैं। केडीए की तरफ से काफी सपोर्ट हैं। अधिकारियों की उपलŽधता और शिकायतों के निस्तारण में तेजी आने से भी बिल्डर्स के बीच भरोसा बढ़ा है।

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इनवेस्टमेंट के नजरिए से क्या रियल स्टेट सेक्टर पहले की तरह सबसे बेहतर विकल्प बना रहेगा?

देखने वाली बात यह है कि तमाम मंदी और दूसरी दिक्कतों के बाद भी जमीन और फ्लैट के दामों में कमी नहीं आई। इस दौरान तमाम जमा योजनाओं में इंटरेस्ट रेट कम हुआ। लोगों ने शेयर बाजार में ही ज्यादा पैसा इनवेस्ट किया। जितनी तेजी से सड़कों और बिजली पानी का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। जमीन और रियल स्टेट सेक्टर भी इनवेस्टमेंट के लिए आकर्षक विकल्प रहेगा। क्योंकि रिटर्न के मामले में अभी भी इससे बेहतर कुछ नहीं है। मौजूदा दौर ने बिल्डर्स को बायर्स के साथ रिलेशनशिप मजबूत करने को मजबूर किया है। जिससे दोनों के बीच भरोसा भी बढ़ा है।

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अफोर्डेबल हाउसिंग को लेकर सरकारी प्रयास कितने कारगर है?

अर्फोडेबल हाउसिंग को लेकर सरकार ने बिल्डर्स को जो विकल्प दिए। उससे ज्यादा की उम्मीद है।क्योंकि मौजूदा समय में सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग में बिल्डर्स को जो दे रही है। उससे तो लागत ही नहीं निकल रही। बिल्डर सस्ते घर बनाए इसके लिए उन्हें अच्छे इंसेंटिव्स देने होंगे। तभी प्राइवेट बिल्डर्स आगे आएंगे। अगले बजट में हम यही उम्मीद भी कर रहे हैं। अफोर्डेबल हाउसिंग के साथ ही हम पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में भी अपना योगदान देना चाहते हैं। इसके लिए ईश्वरीगंज जहां से यह अभियान शुरू हुआ। वहां हम ओडीएफ से आगे की चीजें करने की सोच रहे हैं। जिससे उस गांव को सेल्फ सस्टेनेबल बनाया जा सके।

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विश्वनाथ गुप्‍ता - सीएमडी, डॉल्फिन डेवलपर्स लिमिटेड

'सरकार अब रियल इस्टेट सेक्टर को बूस्ट करेगी। क्योंकि साफ है कि इससे कई दूसरी इंडस्ट्रीज की भी ग्रोथ जुड़ी है। सरकार ने देश के टैक्स स्ट्रक्चर में कई बुनियादी बदलाव किए हैं। जिसका असर अब दिखेगा।रियल इस्टेट सेक्टर में अब तेजी आएगी।

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