-केजीएमयू में व‌र्ल्ड लेवल के प्रोटोकॉल लागू कर 80 फीसद मरीज बचाने का लक्ष्य

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LUCKNOW:

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेस्पीरेटरी आईसीयू ने 60 फीसद मरीजों की जिंदगी बचाने में कामयाबी हासिल की है. डॉक्टर्स की लगन और आधुनिक तकनीक से यह संभव हुआ है. पल्मोनरी मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने आने वाले समय में 80 फीसद मरीजों की जिंदगी बचाने का लक्ष्य रखा है.

सबसे सस्ता आरआईसीयू

केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की ओर से ट्रॉमा सेंटर में 16 बेड का आईसीयू खोला गया है. 16 मार्च 2017 में खुली यूनिट में शुरुआती तीन महीने में 135 गंभीर मरीज भर्ती हुए. जिनमें 60 फीसद की मौत हो गई और 40 फीसद को ही बचाया जा सका. जबकि यूएस में आरआईसीयू में क्योर रेट 80 प्रतिशत है. इस देखते हुए गंभीर मरीजों की मृत्यु दर को कम करने के लिए डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. अजय कुमार की टीम ने पेशेंट केयर व ट्रीटमेंट प्रोटोकाल में बदलाव किया. जिससे अधिक मरीजों की जान बच सकी. डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि अगले तीन माह में काफी बेहतर परिणाम आए हैं. जिसमें 60 फीसद मरीजों को बचाया जा सका.

इन बीमारियों के मरीज हुए भर्ती

आरआईसीयू में सेप्टीसीमिया, स्ट्रोक, क्रोनिक निमोनिया, सीओपीडी, किडनी फेल्योर, लंग कैंसर, स्वाइन फ्लू, डेंगू आदि के मरीजों का इलाज किया गया.

एक्सपर्ट की टीम बचा रही जान

डिपार्टमेंट में फैकल्टी के रूप में डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. अजय कुमार पल्मोनरी क्रिटिकल केयर के एक्सपर्ट हैं. इसके अलावा पल्मोनरी क्रिटिकल केयर में डीएम डॉ. अभिजीत है. जो दिल्ली से बड़े कारपोरेट हॉस्पिटल को छोड़कर यहां आए हैं. इसके अलावा डॉ. जयेंद्र, डॉ. विपुल, डॉ. रोहित, डॉ. अनिल गंगवार की टीम है. 10 सीनियर रेजीडेंट, आठ जूनियर रेजीडेंट, सहित अन्य की टीम है. विभाग के कार्य वाहक एचओडी डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि आईसीयू में पेशेंट केयर के लिए व‌र्ल्ड लेवल का प्रोटॉकाल लागू किया जा रहा है.

सस्ती दरों पर हो रहा इलाज

बड़े बड़े कारपोरेट हॉस्पिटल के आईसीयू को टक्कर दे रहे केजएमयू की दरें भी कम हैं. यहां पर प्रति बेड एक हजार रुपए ही चार्ज रोजाना लिया जाता है और दवाएं भी ज्यादातर संस्थान खुद देता है. इससे मरीजों को किफायती कीमतों पर बेहतर इलाज सुलभ हुआ है.