कंकालों जैसे हैं ये जीवित बच्‍चे
पिछले हफ्ते मोसूल के पास बने यूनीसेफ के हसानसैम शिविर में एक मां अपने दो बच्‍चों के साथ आयी है। भूखमरी के शिकार ये दो बच्‍चे लगभग मृतप्राय नजर आ रहे थे। इसकी वजह ये थी कि इन्‍हें कई दिनों से कुछ खाने को नहीं मिला। कैंप में आने के पूर्व ही ये बच्‍चे इतने कमजोर थे कि इन्‍हें जीवित कहना लगभग असंभव था। इनकी मां भी विश्‍वास नहीं कर पा रही है कि वे जिंदा है। बच्‍चे कैंप में मौजूद डाक्‍टरों द्वारा दिए जा रहे इलाज पर फिल्‍हाल कोई रिस्‍पांस नहीं दे रहे हैं।

आईएसआई आतंकियों ने नहीं दिखाई दया
भूख से तड़प रहे बच्‍चों की मां ने आईएसआई के लोगों से कई बार कहा कि वे उसे या उसके पति को गांव से बाहर जा कर कुछ भोजन की व्‍यवस्‍था करने दें पर उन्‍होंने इजाजत नहीं दी। उसने कई बार भागने की भी कोशिश की पर कामयाब नहीं हो सके। ये बात शिविर में आने के बाद बच्‍चों की मां ने खुद बताई। इराकी और कुर्दिश दलों के हमले के बाद उसके इलाके के आईएसआईएस दलों के पीछे हटने के बाद वे वहां से निकल कर कैंप में पहुंचे हैं। बच्‍चों के जिंदा रहने का उनकी मां को भी यकीन नहीं है।

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सुविधाओं की कमी
इन बच्‍चों में से एक की उम्र नौ साल और दूसरे की दो साल है पर अपनी कमजोर हालत के चलते इनकी उम्र वास्‍तविक से बेहद कम दिखाई पड़ रही है। बेशक बच्‍चे कैंप में आ गए हैं पर यहां भी शरणार्थियों की तुलना में सुविधायें बेहद कम हैं। करीब 47 हजार लोगों के लिए जिनमें प्रतिदिन 3000 की वृद्धि हो रही है, आवश्‍यक सुचविधाओं की बेहद कमी है। इतने लोगों के लिए खाना, कपड़ा तो पूरा नहीं ही पड़ रहा दवायें भी नहीं मिल पा रही हैं।

 

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