1 . सुब्रमण्‍यम स्‍वामी
सुब्रमण्यम स्वामी (66) हावर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त अर्थशास्त्री हैं। इससे पहले वह केंद्रीय वाणिज्य एवं कानून मंत्री भी रह चुके हैं। सिर्फ यही नहीं वह उससे भी पहले योजना आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। इनको शुरू से ही नेहरू-गांधी परिवार का कट्टर विरोधी माना जाता रहा है। इन सबके अलावा 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के याचिकाकर्ताओं में से ये एक थे। फिलहाल वह सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड का केस भी लड़ रहे हैं। स्वामी को जनसंघ परिवार के अंदर प्रधानमंत्री सामग्री के रूप में देखा जाता था। यही कारण है कि उनकी जनसंघ परिवार के अन्य नेता अटल बिहारी वाजपेयी से बिल्‍कुल नहीं बनती थी। इसके बावजूद वे धैर्य रखते हुए भाजपा के साथ बन रहे। इनको 1977, 1980 और 1988 में लोकसभा के लिए चुना गया। 1998 में इनको बतौर राज्यसभा सदस्य मनोनीत किया गया। स्वामी चंद्र शेखर सरकार के दौरान मंत्री भी रहे। कर्नाटक में फोन टेपिंग मामले पर रामाकृष्णा हेगड़े सरकार को इस्तीफा देने के लिए इन्‍होंने ही मजबूर किया था। इनके बारे में एक और खास बात ये है कि स्वामी वही हैं जिन्होंने 1998 में जयललिता और कांग्रेस को साथ लाकर वाजपेयी सरकार को गिरा दिया था।

2 . नरेंद्र जाधव
62 वर्षीय नरेंद्र जाधव अर्थशास्त्री हैं। 2010 से 2014 तक यूपीए सरकार के राज्‍य में जाधव सोनिया गांधी की अगुवाई वाली एनएसी के सदस्य थे। उसके बाद 2009 से 2014 तक योजना आयोग के सदस्य भी रहे। पुणे विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर भी इनको सम्‍मान दिया गया। जाधव मराठी, अंग्रेजी एवं हिंदी के बेहतरीन लेखक भी हैं। इन्होंने बीआर अंबेडकर की जीवनी भी लिखी।

3 . नवजोत सिंह सिद्धू
क्रिकेटर रहे नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर से तीन बार भाजपा के लोकसभा सांसद रह चुके हैं। हो सकता है कि यही वजह रही हो, कि उन्हें मनोनीत किया गया है। इसके अलावा ये भी हो सकता है कि कहीं वह आम आदमी पार्टी में न शामिल न हो जाएं। ऐसी खबरें आ रही थीं कि 'आप' उनको 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की योजना बना रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर से खुद न लड़कर वित्त मंत्री अरुण जेटली को उम्मीदवार बनाने में पार्टी की मदद की थी। इसके बावजूद जेटली चुनाव हार गए थे।

4 . स्वप्न दासगुप्ता
स्वप्न दासगुप्ता एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। 60 वर्षीय दासगुप्ता की पहचान हमेशा से भाजपा समर्थक पत्रकार के तौर पर रही है। बीते साल उन्‍हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने 2004 लोकसभा चुनाव के दौरान कन्याकुमारी से लेकर अमृतसर तक भारत उदय यात्रा की थी। बता दें कि इस यात्रा के दौरान आडवाणी के साथ उनके रथ पर दासगुप्ता भी मौजूद थे। 2006 में राजनाथ की पुरी से दिल्ली तक की भारत सुरक्षा यात्रा में भी वही शामिल थे।

5 . मैरी कॉम
मैरी कॉम मणिपुर की रहने वाली हैं। 33 वर्षीय मैरी कॉम पांच बार मुक्केबाजी चैंपियन रह चुकी हैं। सभी छह विश्व चैंपियनशिप में वह पदक जीतने वाली एकमात्र महिला मुक्केबाज रही हैं। इनको मनोनित करने का मुख्‍य उद्देश्‍य है पूर्वोत्तर राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करना। इन्‍होंने ओलंपिक में मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीता था। यहां बताना जरूरी होगा कि मैरी मणिपुर की कॉम जनजाति से ताल्लुक रखती हैं। वह एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज हैं।

6 . सुरेश गोपीनाथ
सुरेश गोपीनाथ मलयालम अभिनेता हैं। बीते कुछ सालों से सुरेश भाजपा के जाने-माने समर्थक रहे हैं। इसके साथ ही वह मलयालम सिनेमा के मशहूर एक्शन हीरो भी रहे हैं। कई फिल्मों में इन्‍होंने ईमानदार पुलिस अधिकारी की भूमिका अदा है। करीब 200 फिल्मों में अपनी एक्‍टिंग का लोहा मनवाने वाले गोपीनाथ ने कई टीवी शो को भी होस्ट किया है। इनको इनकी प्रतिभा के अनुसार नेशनल फिल्म अवार्ड और फिल्मफेयर अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। इन्‍होंने अंग्रेजी विषय में मास्टर डिग्री भी हासिल की है। दक्षिण भारत की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए गोपीनाथ को मनोनीत किया गया है।

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