राष्‍ट्रगान की अन‍िवार्यता खत्‍म हो गई
सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर 2016 को स‍िनेमाहाल में फिल्‍म शुरू होने से पहले राष्‍ट्रगान बजाने को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था क‍ि सिनेमाहाल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान अन‍िवार्य है। इतना ही इस दौरान लोगों को खड़े होना भी जरूरी हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर अमल करने के लिए एक हफ्ते का समय भी द‍िया था। हालांक‍ि दिव्यांगों के लिए अदालत ने अपने आदेश में थोड़ी नरमी बरती थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का काफी व‍िरोध हो रहा था। ऐसे में कोर्ट ने अब अपने फैसले में बदलाव कर द‍िया है। अब स‍िनेमाहाल में फिल्‍म शुरू होने से राष्‍ट्रगान बजने की और लोगों की खड़े होने की अन‍िवार्यता खत्‍म हो गई है।
सिनेमाहाल में राष्‍ट्रगान बजने को लेकर sc ने द‍िया अब ये आदेश,यहां पढ़ें पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला बदल द‍िया

बतादें क‍ि सु्प्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद से देशभर से हिंसा की कई घटनाएं भी सामने आ रही थीं। लोग इसे देशभक्‍त‍ि नहीं बल्‍क‍ि मजबूरी के ह‍िसाब से मान रहे थे। इतना ही लोग इसकी आड़ में अपनी व्‍यक्‍त‍िगत दुश्‍मनी भी न‍िकालने में पीछे नहीं रहे। कई ऐसे मामले भी सामने आए जहां भीड़ ने किसी कारण से खड़े नहीं होने पर लोगों को पीट दिया था। एक मामला तो काफी चर्चा में रहा, जिसमें शारीरिक रूप से द‍िव्‍यांग व्यक्ति राष्ट्रगान के समय सिनेमाहाल में खड़ा नहीं हो सका। ऐसे में भीड़ ने उसे निशाना बना दिया। सोशल मीड‍िया पर भी ऐसी घटनाएं चर्चा में रहीं। ऐसे में इन मामलों की बढ़ती अध‍िकता देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला बदल द‍िया है।
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याच‍िका में ये बड़े मुद्दे उठाए गए थे
सु्प्रीम कोर्ट ने 2016 में फैसला श्याम प्रसाद चौकसे की याचिका पर सुनाया था। इस याचिका में कहा गया था कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए राष्ट्गान के चलन पर रोक लगनी चाहिए। एंटरटेनमेंट शो में ड्रामा क्रिएट करने के लिए राष्ट्रगान को इस्तेमाल न किया जाए। एक बार शुरू होने पर राष्ट्रगान को अंत तक गाया जाना चाहिए, और बीच में बंद नहीं किया जाना चाहिए। राष्ट्रगान को ऐसे लोगों के बीच न गाया जाए, जो इसे नहीं समझते इसके अतिरिक्त राष्ट्रगान की धुन बदलकर किसी ओर तरीके से गाने की इजाज़त नहीं मिलनी चाहिए। इस तरह के मामलों में राष्ट्गान नियमों का उल्लंघन है, और यह वर्ष 1971 के कानून के खिलाफ है।
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