- भाजपा ने अपना दल (एस) के लिए छोड़ी एक सीट, आशीष बने प्रत्याशी

- सपा छोड़कर आए बुक्कल नवाब, यशवंत और सरोजनी को भी मिला टिकट

- मोहसिन, डॉ. महेंद्र सिंह, विजय पाठक व अशोक कटारिया बनेंगे एमएलसी

इन्हें बनाया गया प्रत्याशी
भाजपा ने जिन दस प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया है उनमें मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह और मोहसिन रजा भी शामिल हैं. ध्यान रहे कि इन दोनों का एमएलसी पद का कार्यकाल आगामी 5 मई को समाप्त हो रहा है. इसके अलावा सपा से आई डॉ. सरोजनी अग्रवाल, यशवंत सिंह, बुक्कल नवाब, बसपा से आए जयवीर सिंह को भी टिकट दिया गया है. पार्टी ने अपने कुछ पदाधिकारियों को भी उच्च सदन भेजने का फैसला लिया है जिनमें विद्यासागर सोनकर, विजय बहादुर पाठक, अशोक कटारिया और अशोक धवन शामिल हैं. भाजपा द्वारा दस और अपना दल (एस) द्वारा एक सीट पर प्रत्याशी घोषित करने से चुनाव निर्विरोध होने की संभावना बढ़ गयी है. ध्यान रहे कि बसपा ने भीमराव अंबेडकर को अपना प्रत्याशी घोषित किया है जबकि एक सीट पर सपा को अपना प्रत्याशी उतारना बाकी है.

बन सकते हैं कई मंत्री
खास बात यह है कि प्रदेश में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार भी होने वाला है लिहाजा एमएलसी बनने वाले कई नेताओं की लॉटरी लगना तय है. एमएलसी बनने से डॉ. महेंद्र सिंह और मोहसिन रजा का मंत्री पद बरकरार रहेगा, वहीं कुछ पदाधिकारियों को उच्च सदन में भेजने के बाद पार्टी मंत्री पद पर उनकी ताजपोशी कर सकती है. इनमें सर्वाधिक चर्चा में विद्यासागर सोनकर, विजय बहादुर पाठक और अशोक कटारिया का नाम है. वहीं सरोजनी अग्रवाल और जयवीर सिंह को भी मंत्री बना दिया जाए तो हैरत की बात नहीं होगी.

प्रत्याशियों का प्रोफाइल
डॉ. महेंद्र सिंह-
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रह चुके डॉ. महेंद्र सिंह योगी सरकार में ग्राम्य विकास और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री हैं. लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा. असम चुनाव में प्रभारी बनाए जाने के बाद मिली जीत से उनका यूपी की राजनीति में कद बढ़ा और बतौर इनाम पार्टी ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया.

मोहसिन रजा-
चुनाव से पहले भाजपा प्रदेश मुख्यालय में बतौर कार्यकर्ता चहलकदमी करने वाले मोहसिन रजा की किस्मत ने पलटा खाया और राज्य सरकार में एक मुस्लिम मंत्री के रूप में उन्हें जगह मिली. क्रिकेटर रह चुके मोहसिन रजा को योगी सरकार में वक्फ एवं हज राज्यमंत्री बनाया गया. इतना ही नही, उन्हें सितंबर में एमएलसी भी मनोनीत कराया ताकि उनका मंत्री पद बरकरार रहे.

सरोजनी अग्रवाल-
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की खास मानी जाने वाली एमएलसी सरोजनी अग्रवाल ने भी अपना एमएलसी पद छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. मेरठ की मशहूर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सरोजनी अग्रवाल के कई शिक्षण संस्थान भी है. वे सपा से कई सालों तक जुड़ी रहीं पर सूबे में योगी सरकार बनने के बाद उन्होंने अपने पूरे परिवार समेत भाजपा का दामन थाम लिया.

बुक्कल नवाब-
बुक्कल नवाब को भी मुलायम सिंह यादव का बेहद करीबी माना जाता था. यही वजह थी कि सपा ने उन्हें दो बार एमएलसी बनाया. अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले बुक्कल नवाब की मुश्किलें तब बढ़ी जब योगी सरकार ने उनके खिलाफ फर्जी तरीके से जमीन का मुआवजा लेने के मामले की जांच तेज कर दी. इसके बाद बुक्कल ने पाला बदलने में देर नहीं की और अपना पद छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये.

यशवंत सिंह-
निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के करीबियों में शुमार यशवंत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से राजनीति का ककहरा सीख चुके हैं. उन्हें सपा ने एमएलसी भी बनाया था. चुनाव के बाद उन्होंने सपा को छोड़ने का फैसला लिया और मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम को उच्च सदन भेजने के लिए अन्य सपा एमएलसी की तरह अपना पद त्याग दिया. अब भाजपा ने उन्हें फिर एमएलसी बनाने का निर्णय लिया है.

जयवीर सिंह-
बसपा एमएलसी जयवीर सिंह ने भी 29 जुलाई 2017 को एमएलसी पद छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. ठाकुर जयवीर सिंह पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाते हैं. वे विगत 6 मई 2012 को बसपा से एमएलसी बने थे. वे बसपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. उनके पुत्र जिला पंचायत अध्यक्ष हैं. अब वे फिर से भाजपा के टिकट पर उच्च सदन जाएंगे.

विद्यासागर सोनकर-
भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर ने विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई थी. हालिया राज्यसभा चुनाव में उन्होंनें नामांकन भी किया था जिसे पार्टी के निर्देश पर वापस ले लिया था. उन्होंने गाजीपुर की सैदपुर सीट से चुनाव भी लड़ा था हालांकि उन्हें जीत हासिल नहीं हुई थी. अक्सर पार्टी मुश्किल वक्त में उन्हें आगे करती रहती है.

विजय बहादुर पाठक-
भाजपा की मीडिया टीम का हिस्सा रहे विजय बहादुर पाठक ने विधानसभा चुनाव में अपने राजनैतिक कौशल का परिचय दिया और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने का काम किया. यही वजह रही कि चुनाव में जीत के बाद उनका कद बढ़ाते हुए उन्हें प्रदेश महामंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी. वह कई दिनों से पूरे प्रदेश में फिर से पार्टी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं. यही वजह है कि पार्टी ने उन्हें एमएलसी बनाने का फैसला लिया है.

अशोक कटारिया-
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक कटारिया की गिनती भी पार्टी के कर्मठ नेताओं में की जाती है. मूल रूप से बिजनौर के रहने वाले अशोक कटारिया ने एबीवीपी से अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत की थी. चुनाव से पहले उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया था. हर चुनाव में पार्टी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपती रही है. उनके अच्छे प्रदर्शन की वजह से अब उन्हें उच्च सदन भेजा जाएगा.

अशोक धवन-
अशोक धवन भी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शुमार किए जाते हैं. माना जा रहा है कि वाराणसी के वरिष्ठ नेता और सात बार विधायक रह चुके श्यामदेव राय चौधरी का टिकट काटकर उन्हें दिया गया है. अशोक धवन पूर्व एमएलसी भी रह चुके हैं. उन्हें एमएलसी का टिकट देने से वाराणसी में पार्टी को मुश्किलों का सामना भी करना पड़ सकता है.

आशीष सिंह पटेल-
भाजपा के सहयोगी दल अपना दल (एस) के प्रदेश अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के पति हैं. उन्हें पिछले साल चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. माना जा रहा है कि अपना दल के सहयोगी रवैये को देखते हुए भाजपा ने उसे एमएलसी की एक सीट तोहफे के रूप में दी है. इसके संकेत हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के राजधानी आगमन के दौरान मिले थे.