पति की मेहनत से अंजू को मिलेगा मेडल
कहते हैं कि हर कामयाब पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है। लेकिन अंजू बॉबी जार्ज के जीवन में उल्‍टा है। अंजू को सफल बनाने और उन्‍हें ट्रेन्‍ड करने के लिए उनके पति बॉबी जार्ज ने सबकुछ न्‍यौछावर कर दिया। बॉबी जार्ज अंजू के सिर्फ पति ही नहीं, बल्‍िक उनके पर्सनल ट्रेनर, जंप कोच, न्‍यूट्रिनिस्‍ट, कुक, और अच्‍छे दोस्‍त भी हैं। अंजू का सपना है कि उन्‍हें एथेंस ओलंपिक में गोल्‍ड मेडल मिले। यह आसान तो नहीं, लेकिन नामुमकिन भी नहीं है। क्‍योंकि इस सपने को चार आंखों ने देखा है, अंजू और उनके पति बॉबी की जिंदगी का सिर्फ एक मकसद है भारत को ओलंपिक में गोल्‍ड मेडल जितवाना।

हर कामयाब पुरुष के पीछे एक महिला होती है लेकिन अंजू बॉबी जॉर्ज की कामयाबी के पीछे एक पुरुष है
यहां से शुरु हुआ था दोनों का सफर
बॉबी जो स्वयं एक मैकेनिकल इंजीनियर और पूर्व राष्ट्रीय चैंपियन हैं, ने अंजू का पूर्णकालिक कोच बनने के लिए 1998 में अपने करियर को समाप्त कर दिया। वह एक प्रतिष्ठित खेल परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनके छोटे भाई जिम्मी जॉर्ज एक प्रसिद्ध वॉलीबॉल खिलाड़ी रहे हैं। अंजू और बॉबी की मुलाकात साल 1996 में भारत में स्‍पोर्ट्स अर्थारिटी ऑफ इंडिया में एक ट्रैनिंग कैंप के दौरान हुई थी। जहां यह दोनों नेशनल कोच पी.टी.जोसेफ के अंडर में ट्रेनिंग ले रहे थे। पहली मुलाकात में ही दोनों अच्‍छे दोस्‍त बन गए। कैंप में कड़ी मेहनत के बावजूद 1998 एशियन गेम्‍स में अंजू क्‍वॉलीफाई करने से चूक गईं। तब बॉबी को अहसास हुआ कि, अंजू को अभी और मेहनत की जरूरत है। इसकी जिम्‍मेदारी बॉबी ने खुद अपने कंधो पर ली और अंजू को ट्रेनिंग देना शुरु कर दिया। कोच बनने के कुछ समय बाद ही अंजू और बॉबी ने साल 2000 में शादी कर ली।

हर कामयाब पुरुष के पीछे एक महिला होती है लेकिन अंजू बॉबी जॉर्ज की कामयाबी के पीछे एक पुरुष है
बॉबी की ट्रेनिंग से अंजू को मिली अपार सफलता
आखिरकार बॉबी की मेहनत रंग लाई। सन् 2001 में अंजू ने तिरुअनंतपुरम में आयोजित नेशनल सर्किट मीट में लंबी कूद के अपने रिकॉर्ड को और बेहतर बनाकर 6.74 मीटर कर दिया। इसी वर्ष उन्होंने लुधियाना में हुए राष्ट्रीय खेलों में ट्रिपल जंप और लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीता। अंजू ने हैदराबाद राष्ट्रीय खेलों में भी अपनी प्रतियोगिताओं में सर्वोच्च स्थान बनाए रखा। यह बॉबी की कड़ी ट्रेनिंग का नतीजा था कि भारत ही नहीं विदेशों में भी अंजू ने अपनी सफलता के झंडे गाड़े। 2002 में मैनचेस्टर में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 6.49 मीटर की कूद लगाकर कांस्य पदक जीता। उन्होंने बुसान में हुए एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने पेरिस में 2003 में हुई विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 6.70 मीटर लंबी कूद लगाते हुए कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया, इसके साथ ही विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गईं।

हर कामयाब पुरुष के पीछे एक महिला होती है लेकिन अंजू बॉबी जॉर्ज की कामयाबी के पीछे एक पुरुष है
अगला लक्ष्‍य है एथेंस ओलंपिक

बॉबी ने अपनी पत्‍नी अंजू को बेहतर एथलीट बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मियां-बीवी का अगला लक्ष्‍य एथेंस ओलंपिक है। बॉबी कहते हैं कि, अंजू अगर ओलंपिक में गोल्‍ड मेडल जीत लेती है। तो यह उसकी अकेले की जीत नहीं, बल्‍िक हमारी जीत कहलाएगी।

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