कहानी :
इराक में आतंकी, अपने आका को बचाने के लिये नर्सों की टोली को अगवा कर लिया है और भारत के पास सात दिन हैं, और बस एक होप जो है टाइगर जो अब ज़ोया और जूनियर टाइगर के साथ ऐल्प्स में रह रहा है और शिकार करना सिखा रहा है, पर देश पे खतरा हो तो 'तू तू तू , तू तू तारा, टाइगर मिशन पे गया दोबारा' (ये मेरा जोक नहीं है, फ़िल्म का है).
tiger zinda hai movie review: बुझी हुई ट्यूबलाइट के बाद जिंदा हुआ टाइगर,यह है सलमान की सबसे बेहतरीन फिल्‍म
समीक्षा :
क्या थी कमी :
फ़िल्म परफेक्ट नहीं है, खासकर डायलॉग कहीं कहीं पर बचकाने हैं पर यही इस फ़िल्म का अकेला फ्लॉ है, बाकी पूरी फिल्म काफी एंटरटेनिंग है। कुछ जगह पर साउंड सिंक/डब में इशू हैं।
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क्या था शानदार :
फ़िल्म में एक्शन कोरियोग्राफी कमाल है और मेरे हिसाब से फ़िल्म बेबी के बाद सबसे बढ़िया एक्शन इस फ़िल्म में ही देखने को मिला है, वैसे तो कुछ एक्शन सेकुएन्सेस काफी लंबे हैं पर चूंकि अच्छे हैं इसलिए फ़िल्म के फेवर में काम करते हैं। फ़िल्म का स्क्रीनप्ले थोड़ा कनविनिएंट है पर शायद वो इसलिए रखा गया है कि फ़िल्म मेन स्ट्रीम बनी रहे इसलिए फ़िल्म में वॉर टर्म्स और रेफरेन्सेस को सिंपल रखा गया है। फ़िल्म में टाइम टाइम पर कॉमिक पंचेस के लिये हिंदुस्तान पाकिस्तान जोक्स को यूज़ करके, दोनों देशों की बीच की दुश्मनी का मखौल उड़ाया गया है, ये काफी स्मार्ट मूव है। कुछ जगह पर फ़िल्म एक तरफा होने न पाए इसलिए सरप्रिसिंगली इस बार भाईजान के साथ भाभी जी भी फ़िल्म में है, इनफैक्ट भाभी जी के एक्शन और स्टंट्स भी कम नहीं हैं, ये भी इस फ़िल्म का अच्छा हिस्सा है। पर फ़िल्म का सबसे अच्छा हिस्सा है इसका मानवीय पहलू, इस लेवल पर ये फ़िल्म बाकी एक्शन्स फिल्मों की तरह छिछली नहीं है, एक लेवल पर देखा जाए तो यही इस फ़िल्म का दूसरा सबसे बड़ा हाईपॉइंट है, पहला तो ऑफकोर्स सलमान खान है। फ़िल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर भी काफी अच्छा है, पर टेक्निकल डिपार्टमेंट में सबसे उम्दा है इस इसकी सिनेमाटोग्राफी, स्ट्राइकिंग और शार्प। एडिट बेहतर होनी चाहिए थी। अब्बास अली ज़फर का निर्देशन सुल्तान से कहीं बेहतर है।
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एक्टिंग:
सज्जाद देलाफरोज,  उस्मान के रोल में एक बढ़िया विलेन बन कर उभरते हैं, इसलिए फ़िल्म अपलिफ्ट होती है। परेश पाहुजा, अंगद बेदी, गेवि चहल और दानिश भट्ट भी ऑप्ट कास्टिंग हैं। कैटरीना भी ताज्जुब की बात है, पर शानदार हैं अपने एक्शन अवतार में, मेरे हिसाब से वो एक्शन फिल्म्स ही करें तो बेहतर है। इस फ़िल्म का पॉवर सरप्राइज हैं परेश रावल जो हर सीन में वाह वाही बटोरते है, और टाइगर तो सलमान ही हैं, कहने की बात ही नहीं है टाइगर वाक़ई फ़िल्म को हर फ्रेम में ज़िन्दा रखता है। शानू शर्मा को इस फ़िल्म की परफेक्ट कास्टिंग के लिए बधाई।
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वर्डिक्ट :
SWAG से करिए इस साल की सबसे बड़ी हिट का स्वागत, वैसे भी इस साल कोई हिंदी फिल्म पिछले साल के किसी बड़े रेकॉर्ड को नहीं तोड़ पाई है...और हां भाई, शर्ट उतरेगी।

 



रेटिंग : 4.5 स्‍टार

Yohaann Bhargava
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