मेरठ. स्वच्छता को लेकर चलाए जा रहे महज अभियान से जनपद या प्रदेश स्वच्छ होने वाला नहीं है. इसके लिए हर एक व्यक्ति को आगे आने की जरूरत है. सफाई को लेकर खुद चिंतन क रना होगा. लोगों को अपनी आदत में सुधार लाना होगा. कहने का मतलब यह कि हमें व आप क ो यह तय संक ल्प लेना होगा कि रास्ते में केला या कुछ खाएंगे तो उसका छिलका डस्टबिन में ही फेंके. इतना ही नहीं घरों की सफाई के बाद निकलने वाले कूड़े को घर के अंदर एक डस्टबिन में रखेंगे और उसे कूड़ा गाड़ी आने पर उसमें ही डालेंगे. इसके साथ यही आदत खुद के साथ अपने बच्चों में भी डालनी होगी. जब हम सब अपनी इस आदत में सुधार कर लेंगे तो अपने आप शहर व जिले में स्वच्छता नजर आएगी. इसके बाद गंदगी फैलाने वालों को बेझिझक टोकना भी पड़ेगा. ऐसा करने से लोगों में एक शर्म पैदा होगी कि यदि वह सड़क या इधर-उधर कचरा फेंकेगा तो सार्वजनिक स्थल पर कोई टोक सकता है. बगैर आदत में सुधार आए सिर्फ सरकारी मशीनरी व योजनाओं के दम पर स्वच्छता अभियान का सफल होना मुश्किल है. क्योंकि गंदगी फैलाने वाले लाखों लोग होते हैं और हर कदम पर उस कचरे को साफ करने के लिए कर्मचारियों की संख्या गिनीचुनी ही होती है. ऐसे में वे कर्मचारी नियमित रूप से सुबह शाम सफाई करके चले जाते हैं. सफाई करके कर्मचारियों के जाते ही लोग फिर कचरा फैलाना शुरू कर देते हैं. स्कूलों में भी बच्चों को शिक्षक सफाई के प्रति जागरूक करें, इतना ही नहीं उन्हें सफाई से होने वाले फायदों के बारे में भी बताया जाना आवश्यक है. जिस दिन बच्चों में सफाई को लेकर जागरूकता पैदा हो जाएगी उस दिन वे खुद अपने अभिभावकों को सड़क पर या इधर-उधर कचरा फेंकने पर टोकने से खुद को रोक नहीं सकेंगे. मेरा मानना है कि इस तरह स्वच्छता अभियान को हम सब मिलकर सफल बना सकते हैं.

राजीव शर्मा, चेयरमैन, प्रेसीडेंसी स्कूल एंड कॉलेज