आगरा:  विवादों में घिर रहने वाले एससी आयोग के अध्यक्ष और सांसद राम शंकर कठेरिया का एक कारनामा फिर सामने आया. उन्होंने एक सिपाही पर मारने के लिए हाथ उठा लिया. सिपाही ने बचाव के लिए हाथ से रोकने की कोशिश की. ये पूरी घटना वीडियो में कैद कर ली गई. हालांकि सांसद का कहना है कि वे किसी पर भी हाथ उठाते नहीं हैं.

एससी आयोग के अध्यक्ष और सांसद रामशंकर कठेरिया सुबह करीब 9 बजे अपनी गाड़ी से भगवान टाकीज ओवर ब्रिज से अब्बूउल्लाह की ओर जा रहे थे. ब्रिज से उतरने के दौरान फाउंड्री नगर डिपो की देहरादून जा रही रोडवेज बस सवारी भरकर अचानक चल पड़ी. इससे सांसद कठेरिया की गाड़ी की खिड़की टकरा गई. सांसद आग बबूला हो गए. उन्होंने आगे गाड़ी रुकवाई और हंगामा काटना शुरू कर दिया. इस बीच एक ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंच गया. तमतमाए सांसद कठेरिया उसके पास पहुंचे और उसको मारने के लिए हाथ उठा लिया. पुलिस कर्मी ने बचाव की मुद्रा में अपना हाथ चेहरे के सामने लगा लिया. इसके बाद सांसद ने रोडवेज आरएम को मौके पर बुलाया और उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई. अवैध बस अड्डा पर जमकर आपत्ति की. बसें वहां से रवाना होने लगी. ये सारी घटना वीडियो में कैद कर ली गई है.

सांसद कठेरिया ने ट्रैफिक पुलिस पर उठाया हाथ

रोडवेज अधिकारी की मनमानी

भगवान टॉकीज ओवरब्रिज अब्बूउल्लाह दरगाह के पास रोडवेज बस लाइन से खड़ी होकर सवारी भरती हैं. इससे ब्रिज पर लंबा जाम लग जाता है. कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं. इसकी शिकायत कई बार रोडवेज अधिकारियों से भी की गई. इन्होंने खोज खबर तक नहीं ली. सांसद की गाड़ी टकराने के बाद रोडवेज आरएम हरकत में आए.

एसपी ट्रैफिक को सुनाई खरी खोटी

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सांसद कठेरिया ने गाड़ी से उतरते ही जमकर खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी. मौजूद ट्रैफिक पुलिस से गाड़ी का चालान करने को कहा. चालान बुक नहीं होने पर लूट खसोट का आरोप लगाकर बिफर गए. एसपी ट्रैफिक तेज स्वरूप सिंह मौके पर पहुंचे, तो उन पर भी सांसद कठेरिया बरस पड़े. उन्हें बाहर भेजने तक धमकी दे डाली. ट्रैफिक एसपी ने बस का तत्काल चालान कराया.


चार शिफ्ट में है ड्यूटी, एसपी ट्रैफिक नकारे रहे

ओवरब्रिज के नीचे चार शिफ्ट में सिपाहियों की ड्यूटी रहती है. दो शिफ्ट सुबह और दो शाम की होती हैं. रविवार सुबह की शिफ्ट 8 से 12 में ड्यूटी नागेश कुमार की थी. हालांकि एसपी ट्रैफिक का कहना है कि वहां ड्यूटी लगती ही नहीं है. वे मामले को दबा रहे हैं.