-ट्रैफिक कॉन्स्टेबल को ट्रैफिक संभालने के लिए करनी होती है 30 दिन की स्पेशल ट्रेनिंग

-पुलिस लाइंस में 3 दिन की ट्रेनिंग करने के बाद शहर के चौराहों पर उतार दिए होमगार्ड

<-ट्रैफिक कॉन्स्टेबल को ट्रैफिक संभालने के लिए करनी होती है फ्0 दिन की स्पेशल ट्रेनिंग

-पुलिस लाइंस में फ् दिन की ट्रेनिंग करने के बाद शहर के चौराहों पर उतार दिए होमगार्ड

BAREILLY BAREILLY:

ट्रैफिक पुलिस की मौजूदा स्ट्रेंथ

एसपी ट्रैफिक-क्

सीओ ट्रैफिक-क्

टीआई-ख्

टीएसआई-फ्

एचसीपी-क्ब्

एचसी-ख्

कॉन्स्टेबल-भ्ब्

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होमगार्ड दिसम्बर ख्0क्7 -7भ्

जनवरी ख्0क्8-क्7भ्

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शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने वाली ट्रैफिक पुलिस ने चौराहों और मेन प्वाइंटों की कमान ही अनट्रेंड हाथों मैं सौंप रखी है. चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था संभाल रहे होमगार्डो को सही मायने में तो ट्रैफिक रूल्स ही जानकारी नहीं है. वह मौका मिलते ही सभी एक तरफ खड़े होकर बाते करने में लग जाते हैं. चौराहों पर कोई ट्रैफिक सिग्नल तोड़कर निकल जाए या फिर जाम लगता रहे इस बात का उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने वेडनसडे को रियलिटी चेक किया तो हकीकत सामने आ गई.

सर्किट हाउस चौराहा

सर्किट हाउस चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए तीन होमगार्ड की ड्यूटी तो लगी है. लेकिन वह सभी एक साथ खड़े होकर बातें करते नजर आए. वह बातों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि चौराहे पर ट्रैफिक धीमा हो या फिर जाम जैसे हालत हो जाएं लेकिन इसके बाद भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है.

चौकी चौराहा

चौकी चौराहा पर करीब आधा दर्जन से अधिक होमगार्ड की ड्यूटी के साथ ट्रैफिक पुलिस की भी मौजूद थी. चौकी चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड एक ही जगह पर खड़े हो जाते हैं. जिसके बाद वह गाडि़यों को रोककर चेकिंग करने में व्यस्त हो जाते हैं.

ईसाइयों की पुलिया

ईसाइयों की पुलिया पर दो होमगार्ड की ड्यूटी लगी हुई थी. एक होमगार्ड पीछे हाथ किए किनारे खड़ा था जबकि दूसरा अपनी बाइक पर बैठा था. ईसाइयों की पुलिया पर बार-बार रोड पर जाम जैसी स्थित बन रही थी लेकिन ड्यूटी पर लगे होमगार्ड ऐसे खड़े थे जैसे कि उन्हें कोई मतलब ही नहीं.

सेटेलाइट चौराहा

सेटेलाइट चौराहा पर भी आधा दर्जन से अधिक होमगार्ड और ट्रैफिक पुलिस के टीएसआई कॉन्स्टेबल आदि मौजूद दिखे. लेकिन वह ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की जगह ट्रैफिक पुलिस चेकिंग और होमगार्ड एकजुट होकर बाते करने में लगे हुए थे. इस दौरान चौराहे पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर उनका कोई ध्यान नहीं था.

तीन दिन की ट्रेनिंग और बन गए ट्रैफिक होमगार्ड

चौराहों पर ड्यूटी करने वाले होमगार्डों को ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी तो एसपी ट्रैफिक ने दे रखी है. लेकिन सही मायने में तो उन्हें ट्रैफिक रूल्स की ठीक से जानकारी ही नहीं है. क्योंकि एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल को ट्रैफिक रूल्स की कम से कम फ्0 दिन स्पेशल ट्रैंिनंग करनी होती है. इसके ठीक उलट जब होमगार्ड को ट्रैफिक सुधारने के लिए ड्यूटी पर लगाया जाता है तो उसे पुलिस लाइंस में सिर्फ तीन दिन की ट्रैनिंग कराई जाती है. जिसके बाद उसे चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए लगा दिया जाता है. कई बार तो चौराहों पर ड्यूटी करने वाले होमगार्ड और पुलिस पर उगाही करने का भी आरोप लग चुका है.

शहर में जाम की समस्या को देखते हुए क्00 होमगार्ड भी बढ़ा दिए गए हैं. जिससे ट्रैफिक व्यवस्था शहर में ठीक रहे. होमगार्ड अगर चौराहों पर एक ही जगह पर खड़े होकर बाते करते है तो यह गलत है. उन्हें ट्रैफिक व्यवस्था ठीक करने के लिए लगाया गया है. चौराहों पर होमगार्डो को चेक किया जाएगा और इकट्ठे मिलने पर कार्रवाई की जाएगी.

कमलेश बहादुर, एसपी ट्रैफिक

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