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संत में है ज्ञान, कर्म और भक्ति का संगम

By: Inextlive | Publish Date: Fri 21-Apr-2017 07:41:10
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संत में है ज्ञान, कर्म और भक्ति का संगम

- भक्त के संकट में साथ देते हैं भगवान, कथाव्यास ने संत और भगवंत का बताया रहस्य

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- भक्त के संकट में साथ देते हैं भगवान, कथाव्यास ने संत और भगवंत का बताया रहस्य

BAREILLY:

BAREILLY:

त्रिवटीनाथ मंदिर में चल रहे श्रीराम चरितमानस कथा के दूसरे दिन कथाव्यास ने संत और भगवंत के मिलन का रहस्य श्रद्धालुओं को बताया। पंडित उमाशंकर व्यास ने संत की व्याख्या करते हुए बताया कि संत समाज तो मानो चलते फिरते तीर्थराज प्रयाग के समान हैं। प्रयाग में जैसे गंगा यमुना एवं सरस्वती का संगम होता है। उसी तरह संत समाज में भी भक्ति गंगा, कर्म यमुना और ज्ञान सरस्वती के समान है। जीवन में भक्ति, ज्ञान और कर्म से युक्त आचरण करने पर शरीर संगम के समान हो जाता है। तब संत और परमात्मा का मिलन हो जाता है.

भरत में थे संत के सारे गुण

कथाव्यास ने कहा कि श्री राम के भाई भरत भक्ति, कर्म और ज्ञान रूपी संगम और संत के समान आचरण वाले हैं। पुराणों में सर्वत्र यही कहा गया है कि संत और भगवंत में कोई अंतर नहीं होता है। संत का उद्देश्य जगत का कल्याण है। संत सभी में प्रभु का दर्शन करते हैं। भगवान श्री राम ने कहा था कि ज्ञानी मेरा बड़ा बालक है और भक्त मेरा छोटा बालक है। दोनों के जीवन में काम, क्रोध की समस्याएं रहती है। सिर्फ अंतर यही है कि ज्ञान स्वयं अपने बल से लड़ता है और भक्त की ओर से मैं स्वयं लड़ता हूं। जीवन में अडिग विश्वास बरगद के वृक्ष के समान होना चाहिए। जिसके मूल में गहराई न हो उसे ढहते देर नहीं लगती। अडिग विश्वास से हर परिस्थिति में हमारा परमात्मा हमारे साथ हो जाता है। कथा के विश्राम से पहले श्रद्धालुओं ने आरती की और प्रसाद ग्रहण किया। कथा में मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ, हरि ओम अग्रवाल, संजीव औतार अग्रवाल व अन्य मौजूद रहे.

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