#FakeAadhaar : 50 रुपये में बेच रहे थे देश की 'नागरिकता'

By: Inextlive | Publish Date: Mon 11-Sep-2017 12:40:22
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#FakeAadhaar : 50 रुपये में बेच रहे थे देश की 'नागरिकता'
महज 50 रुपये दीजिए और आधार कार्ड हासिल कर लीजिए। खास बात यह है कि कार्ड के लिये जरूरी दस्तावेज न हो, तो भी चलेगा।

10 जालसाजों को दबोचा
हैरानी की बात यह है कि फर्जीवाड़े का यह काम भी यूआईडीएआई द्वारा नियुक्त ऑथेंटिक ऑपरेटर नहीं बल्कि, उसके द्वारा अवैध रूप से नियुक्त किये गए सब एजेंट कर रहे थे। वह भी ऐसे सॉफ्टवेयर की मदद से, जिसके जरिए जालसाज बायोमेट्रिक ऑप्शन को ही बाईपास कर सीधे सर्वर तक पहुंच जाते थे। यूपी एसटीएफ ने रविवार को ऐसे ही जालसाजों के गैंग का राजफाश करते हुए सरगना समेत 10 जालसाजों को दबोच लिया। आरोपियों के कŽजे से 11 लैपटॉप, 18 आधार कार्ड, दो फिंगर स्कैनर डिवाइस, 12 मोबाइल फोन, 1 वेब कैम और फर्जीवाड़े में इस्तेमाल किये जाने वाली तमाम सामग्री बरामद की है। वहीं आईजी अमिताभ यश ने खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपए व डीआईजी मनोज तिवारी ने 25 हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की है।

दर्ज थी तीन एफआईआर
आईजी एसटीएफ अमिताभ यश के मुताबिक, बीते दिनों एसटीएफ को प्रदेश के प्रमुख शहरों में टेंपर्ड क्लाइंट एप्लीकेशन के जरिए ऑपरेटर्स और इनरोलमेंट एजेंसी के नॉन परमिटेड कर्मियों द्वारा ऑपरेटर्स के लिये प्रमाणित लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गैंग के सक्रिय होने की सूचना मिली। इस तथ्य की जानकारी होने पर यूनिक आईडेंडिटी ऑथेंटिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईएडीआई) के डिप्टी डायरेक्टर ने एसटीएफ ऑफिस स्थित साइबर क्राइम थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इससे पहले आधार कार्ड से ही रिलेटेड एफआईआर देवरिया और कुशीनगर में भी दर्ज कराई गई थीं। इन मामलों की जांच एएसपी त्रिवेणी सिंह और उनकी टीम को सौंपी गई।

क्लोन फिंगर प्रिंट से पूरा 'खेल' करते थे जालसाज
आईजी अमिताभ यश के मुताबिक, पूछताछ के दौरान मास्टरमाइंड सौरभ सिंह ने बताया कि आधार कार्ड बनाने के लिये उसने लाइसेंस ले रखा था। आधार वेबसाइट की क्लाइंट एप्लीकेशन में उसकी फिंगर प्रिंट स्कैन होने के बाद ही वेबसाइट एक्सेस होती थी। उसने बताया कि उसे सब एजेंट नियुक्त करने थे लेकिन, एप्लीकेशन को एक्सेस करने के लिये उसने फिंगर प्रिंट का तोड़ निकाल लिया। उन्होंने क्लोन फिंगर प्रिंट तैयार कर अपने एजेंट को बांट दिये। जिसकी मदद से एजेंट एप्लीकेशन को एक्सेस कर धड़ल्ले से आधार कार्ड बनाने लगे। सरगना समेत 10 दबोचे जांच के दौरान टीम को पता चला कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में यह गैंग सक्रिय है और गैंग का मास्टरमाइंड सौरभ सिंह कानपुर के बर्रा इलाके में रहता है। जिसके बाद यूपी एसटीएफ की टीम ने रविवार को बर्रा स्थित विश्व बैंक कॉलोनी में छापेमारी कर आरोपी सौरभ को अरेस्ट कर लिया। उसकी निशानदेही पर टीम ने उसके भाई शुभम सिंह, शोभित सचान, फतेहपुर निवासी शिवम कुमार, मनोज कुमार, मैनपुरी निवासी तुलसीराम, प्रतापगढ़ निवासी चमन गुप्ता, आजमगढ़ निवासी गुड्डू गोंड और चकेरी, कानपुर निवासी सतेंद्र कुमार को अरेस्ट कर लिया।

रोक लगी तो बनाया सॉफ्टवेयर
डीआईजी/एसएसपी मनोज तिवारी ने बताया कि क्लोन फिंगर प्रिंट के जरिए एप्लीकेशन एक्सेस कर फर्जी आधार कार्ड बनाने की भनकलगने पर यूआईएडीआई ने इसे एक्सेस करने के लिये लाइसेंसी के आईरिस (आंख की पुतली) स्कैन को कंपलसरी कर दिया। इसके लागू होते ही फर्जीवाड़े पर रोक लग गई। लेकिन, सौरभ ने हैकर की मदद से एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार कराया, जिसके जरिए बायोमेट्रिक व आईरिस स्कैन को बाईपास कर सीधे एप्लीकेशन तक पहुंचा जा सकता था। सॉफ्टवेयर बेचकर की कमाई इसकी मदद से न सिर्फ सौरभ ने एक बार फिर आधार कार्ड बनाने शुरू कर दिये बल्कि, इस सॉफ्टवेयर को 5-5 हजार रु पये में दूसरे जालसाजों को बेचना शुरू कर दिया। उसने यह सॉफ्टवेयर मध्य प्रदेश, राजस्थान छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में सप्लाई कर दिया। मीडियाकर्मियों के समक्ष सौरभ व अन्य आरोपियों ने कुबूल किया कि उन्होंने फर्जीवाड़े से अब तक हजारों आधार कार्ड बनाए हैं। उसने बताया कि वह और उसके साथी कार्ड बनाने के लिये अपने कस्टमर्स से 50 से 100 रुपये तक वसूलते थे।

81 लाख कार्ड हो चुके हैं डी-एक्टिवेट

यूआईएडीआई ने बीते दिनों 81 लाख आधार कार्ड को डी-एक्टिवेट कर दिया था। उस वक्त इसकी कोई वजह नहीं बताई गई थी। रविवार को एसटीएफ के खुलासे के बाद यह बात साफ हो गई कि सौरभ और उसके जैसे कई और जालसाजों ने इसी तरह फर्जीवाड़ा कर आधार कार्ड तैयार कर दिये। जिसकी भनक लगने पर यूआईएडीआई ने यह कार्रवाई की थी। गौरतलब है कि डी-एक्टिवेट किये गए आधार कार्ड में भारी संख्या उन काड्र्स की है, जिनके दस्तावेज सही थे लेकिन, नॉन परमिटेड कर्मियों द्वारा बनाए जाने की वजह से इन्हें भी डी-एक्टिवेट कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर जालसाज फर्जी आधार कार्ड बनाकर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने में लगे हैं।

ऐसे तैयार करते थे क्लोन फिंगर प्रिंट
एएसपी त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि पहले वे आधार कार्ड बनाने के लिये परमिटेड लाइसेंसी के फिंगर प्रिंट को स्कैन पर लेते थे। इसके बाद उसका बटर पेपर पर लेजर प्रिंटर से प्रिंटआउट निकालते थे। इसके बाद फोटो पॉलीमर रेजिन केमिकल डालकर पॉलीमर क्यूरिंग उपकरण में पहले 10 डिग्री सेल्सियस और उसके बाद 40 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर पर नकली फिंगर प्रिंट को असल की तरह तैयार कर लेते थे। उसी फिंगर प्रिंट की मदद से वेबसाइट को एक्सेस कर आधार कार्ड बना लेते थे।

बीसीए पास है मास्टरमाइंड
खुलासा करने वाली टीम में शामिल इंस्पेक्टर अभिनव सिंह पुंडीर ने बताया कि गैंग के सरगना सौरभ सिंह ने कानपुर स्थित वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर से बीसीए कंपलीट कर रखा है। इसी के बाद उसने आधार कार्ड बनाने का लाइसेंस प्राप्त किया था। हालांकि, वह ज्यादा रुपये कमाने की कोशिश में फर्जीवाड़े में जुट गया और उसने पहले क्लोन फिंगर प्रिंट और उसके बाद बायोमेट्रिक्स व आईरिस को बाईपास करने वाले सॉफ्टवेयर की मदद से आधार कार्ड बनाने शुरू कर दिये।

चेक कीजिए अपना आधार कार्ड
कहीं आपका आधार कार्ड भी ऐसे ही किसी जालसाज या नॉन परमिटेड शख्स द्वारा तो नहीं बनाया गया, जिसे यूआईडीएआई द्वारा डी-एक्टिवेट किया जा चुका है। इसे जानने के लिये यूआईडीएआई की वेबसाइट चेक करें।

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