छ्वन्रूस्॥श्वष्ठक्कक्त्र: टैगोर सोसाइटी की ओर से साकची स्थित रवींद्र भवन में शनिवार को बसंतोत्सव मनाया गया. जो रवींद्रनाथ टैगोर की बसंत ऋतु पर आधारित रचनाओं से प्रेरित और उनकी कालजयी प्रकृति प्रेमी रचनाओं के साथ कलाप्रेमियों के जुड़ाव को दर्शा रहा था. कविगुरु ने बसंत को जीवन का उत्सव बताया था और उनकी रचनाओं में ऋतुओं की जो प्रधानता नजर आती है, कार्यक्रम में भी ऐसा ही प्रदर्शित किया गया. सोसाइटी के मानद महासचिव आशीष चौधरी ने बताया कि बसंत उत्सव का मुख्य उद्देश्य कला एवं संस्कृति के माध्यम से जीवन और ऋतुओं के तालमेल को दर्शाना था कि किस प्रकार ऋतु हमारी मन:स्थिति को चित्रित करते हैं. जिस प्रकार हम जीवन में खुशियों को बसंत कहते हैं, उसी प्रकार बह्मांड की खुशियों की स्थिति का नाम बसंत है, जो हमें दुख और सुख के बीच खड़े होकर जीवन को एक नये नजरिए से देखने का अनुभव प्रदान करता है.

उत्सव में टैगोर सोसाइटी के स्कूल ऑफ आ‌र्ट्स के 170 छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया. उनके द्वारा प्रस्तुत कविगुरु की रचनाओं में 'आजी बोसोंतो जागृतो दारे..' आदि थे. कार्यक्रम का संचालन सब्यसाची चंदों ने किया. संगीत निर्देशन चंदना चौधरी, नृत्य निर्देशन रीता मित्रा, मोनीदीपा दास ने किया.