- श्रृद्धा और आस्था के साथ मन्नतों के लिए भोले कर रहे कांवड़ यात्रा

- कोई सेहत तो कोई सुख- समृद्धि की मान रहे मनौती

Meerut . महाशिवरात्रि के अवसर पर कांवड़ यात्रा बाबा भोले के प्रति भक्तों की आस्था और श्रद्धा के साथ उनकी मन्नतों को भी पूरा करने का एक माध्यम है. बाबा भोले को प्रसन्न करने के लिए 100 से 200 किमी का पैदल सफर कर जल लेकर आने वाले कांवडि़ए अपने मन में कुछ अधूरी इच्छाएं लेकर कांवड़ यात्रा को पूरा करते हैं. उनकी इस यात्रा से बाबा भोले प्रसन्न हों और मन्नत को पूरा कर दें बस यही इच्छा उन्हें कष्ट सहकर यात्रा पूरा करने का जज्बा देती है.

5 साल की उम्र से यात्रा

8 साल के रोहन ने अपने पापा की बीमारी को जल्द से जल्द दूर करने की मन्नत के लिए 5 साल की उम्र में दिल्ली से हरिद्वार तक पैदल कांवड़ यात्रा शुरु की थी. पिछले तीन साल से रोहन इस यात्रा को पैदल पूरा कर रहा है. रोहन ने बताया कि हर साल पापा की सेहत में सुधार हो रहा है इसलिए वह हरिद्वार से जल लाकर बाबा भोले को प्रसन्न कता है.

सदभाव के लिए यात्रा

देश में भाईचारा और सदभावना बनी रहे. इसके लिए दिल्ली के आरके पुरम निवासी अजित हर साल अपनी टोली के साथ कांवड़ यात्रा पर जाते हैं. पूरे जोश के साथ हरिद्वार तक पैदल ट्रॉली कांवड़ लाकर यात्रा पूरी की जाती है.उनका मकसद सिर्फ देश में शांति और सदभवना है.

भाई का सहारा बनी बहन

हरियाणा के अलवर निवासी दीपा पिछले दो साल से अपने भाई पवन के साथ कांवड़ यात्रा पर जा रही हैं. दीपा ने बताया कि भाई की तीन साल पहले यात्रा के दौरान तबीयत खराब हो गई थी. इसलिए वह भगवान की भक्ति के साथ भाई की देखभाल के लिए कांवड़ यात्रा पर जाती है और भाई की लंबी उम्र की मन्नत मांगती है.

सुख समृद्धि की मन्नत

कल्याणनगर निवासी हेमंत भी हर साल अपने परिजनों की सेहत और घर की सुख समृद्धि के लिए मेरठ से हरिद्वार पैदल यात्रा करते हैं. उन्होंने बताया कि यात्रा में ना तो थकावट महसूस होती और ना ही किसी प्रकार का दर्द होता है बस सुकून मिलता है. बाबा के आशीर्वाद के लिए कांवड़ यात्रा पर जाते है.