Movie review: बेगानी शादी में 'भरोसे' दीवाना

By: Molly Seth | Publish Date: Fri 17-Feb-2017 04:22:00
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Movie review: बेगानी शादी में 'भरोसे' दीवाना
'बचपन से ही न मुझे शादी करने का बड़ा शौक है बाय गॉड'। 'मैं तो भाग रही हूँ'। 'एक बार शादी हो गई, तो फिर किसी ने क्या कर पाना है, बस पैरों में गिर जाना है दार जी के....'। ये सभी डायलॉग फिल्म 'जब वी मेट' से हैं. इन्‍हीं तीन संवादों से फिल्म रनिंग शादी का कांसेप्ट चुराया गया है। पहले ही बता दिया जाए की रनिंग शादी, फिल्‍म शादी.कॉम का ही नया नाम है हालाकि दोनों का कनेक्‍शन अजीब सा है और लगता है इस मैटरीमोनियल साइट ने फ़िज़ूल ही अपना वक़्त बर्बाद किया केस करके।

शादी की की कहानी भारतीय शौक की जुबानी
शादी करना और भारतीयों का सबसे फेवरिट काम है, जैसे ही जन्म होता है, बच्चे का पूरा खानदान साथ ही पडोसी भी उसकी शादी के सपने देखने लग जाते हैं, हिंदी फिल्मों का भी शादी से बड़ा गहरा रिश्ता है। हर दूसरी फिल्म का बैकड्राप ले दे के शादी ही होता है। ऐसे में आज (फाइनली) रिलीज़ हुई रनिंग शादी कैसी लगी मुझे आइये आपको बताते हैं।

Movie : Running Shaadi
Cast : Tapsee Pannu, Amit Sadh and Arsh Bajwa
Director : Amit Roy

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कहानी
राम भरोसे (अमित साध) अपने मालिक की बेटी निम्रत उर्फ़ निम्मी (तपसी पन्नू) को प्यार करता है। किसी कारण उसकी नौकरी छूट जाती है तो वो अपने दोस्त सरबजीत उर्फ़ साइबर जी (अर्श बजवा) के साथ मिल कर एक वेबसाइट खोलता है जिसमें वो प्यार में पड़े हुए कपल्ज़ को भगा कर शादी करवाने का ठेका लेता है...फिर एक दिन निम्मी ही आ जाती है उसकी सर्विसेज लेने के लिए। फाइनली क्या होगा...गेस कीजिये...अरे वाह आपने तो फ़ौरन गेस कर लिया। मुबारक हो...आप 'सही पकडे हैं'।
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कथा, पटकथा और निर्देशन
कांसेप्ट मुझे पसंद आया, इस पर एक बढ़िया फिल्म बन सकती थी। पर रनिंग शादी एक बीमारी से ग्रसित है, जिसे कहते हैं 'बैंड बाजा बारात'; सिंड्रोम। आधी से ज्यादा फिल्म 'बैंड बाजा बारात' और पुलकित सम्राट की फ्लॉप फिल्म 'बिट्टू बॉस' जैसी लगती है। फिल्म का स्क्रीनप्ले बेहद प्रेडिक्टेबल है और फिल्म की स्क्रिप्ट में काफी झोल झाल हैं। फर्स्ट हाफ तो किसी तरह कट जाता है पर सेकंड हाफ में आपका हॉल से रनिंग करने का मन ज़रूर करेगा। ये सब करतूत फिल्म के खराब स्क्रीनप्ले की है। फिल्म के संवाद ठीक ठाक हैं। टेक्निकली फिल्म ठीक ठाक है पर ऐसा कुछ नया नहीं है जो आपको सीट से बाँध कर एंड तक रख सके।
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अदाकारी
'बिट्टू शर्मा' की आत्मा को अपने अन्दर बसाए हुए अमित साध ने इस फिल्म में बढ़िया काम किया है। तापसी ने 'जब वी मेट' की गीत के चाल ढाल कॉपी किये हैं, काफी बिंदास रोल है। दोनों किसी तरह से खराब कहानी में पैबंद लगाते रहते हैं। अगर कोई किरदार आपको इम्प्रेस करता है तो वो हैं अर्श बाजवा जो काफी कोम्पेलिंग एक्टर हैं।
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संगीत
फिल्म का संगीत रूखा सूखा और रूटीन है, कोई भी गाना ऑफ द चार्ट नहीं है। फिल्म का पार्श्वसंगीत भी 'ऐयवें' ही है...। कुल मिलाकर अगर आप जॉली एल एल बी -2 देख चुके हैं, और गाज़ी अटैक भी देख चुके हैं, और आपके पास पेटीएम् से कुछ फ्री टिकेट या कैशबैक आया हो तो एक बार जाकर देख सकते हैं ये फिल्म। वैसे बेहतर होगा की आप, 'बैंड बाजा बारात' फिर से देख लीजिये, किसी ना किसी चैनल पर चल ही रही होगी।

 


फिल्म का बॉक्सऑफिस प्रेडिक्शन : फिल्म अपने पूरे रन में 10-15 करोड़ तक कमा सकती है।

Review by : Yohaann Bhaargava
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