-सीएम बोले, अगले एक माह तक एमओयू का क्रम रहेगा जारी

खास बातें

-इनवेस्टर्स समिट 2018 में कुल 1.20 लाख 150 करोड़ रुपए के एमओयू साइन

-तमाम सेक्टर्स में कुल एमओयू की संख्या 601

-कृषि व होल्टिकल्चर के क्षेत्र में 4834 करोड़

-एरोमा सेक्टर्स में 1325 करोड़

-आगर्निक खेती को 1309 करोड़

-हार्टिकल्चर क्षेत्र में 2200 करोड़

- रसना करेगा 500 करोड़ निवेश

-आयुर्वेद में 3 हजार के एमओयू.

-पर्यटन में 30 हजार करोड़

देहरादून, 7 अक्टूबर से दून में आयोजित हुए दो दिवसीय इनवेस्टर्स समिट 2018 का समापन हो गया. समिट में निवेशकों का जबरदस्त रुझान देखने को मिला. दावा किया गया है कि समिट में 1.20 लाख 150 करोड़ रुपए के 601 एमओयू साइन हुए हैं. जिसका क्रम अगले एक माह तक जारी रहेगा. जबकि मंगलवार को भी कुछ एमओयू होने प्रस्तावित हैं. यह बात खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कही. वे महाराणा स्पो‌र्ट्स कॉलेज में इनवेस्टर्स समिट के समापन समारोह में बोल रहे थे.

40 हजार करोड़ की थी उम्मीद

राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए राज्य गठन के बाद पहली बार तमाम प्रदेशों व देशों को जोड़ने के लिए बृहद स्तर पर इनवेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया. इसके लिए पिछले पांच माह से सरकार जी-जान से जुटी हुई थी. देशभर के तमाम शहरों में रोड शो, मिनी कॉनक्लेव के साथ कई देशों का दौरा भी किया गया. वैसे तो शुरुआत में सरकार लगभग 40 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू होने की संभावना जता रही थी, लेकिन समिट शुरू तक यह आंकड़ा लगभग 74 हजार करोड़ के पास पहुंच गया था. समिट के दौरान हुए एमओयू के बाद आखिर में यह आंकड़ा 1 लाख 20 हजार 150 करोड़ तक पहुंच गया.

सरकार नतीजों से संतुष्ट

समिट के समापन सत्र में सीएम ने खुद इन आंकड़ों प्रस्तुत करते हुए इस माह सरकार को और अधिक निवेशकों के प्रस्ताव मिलने वाले हैं. इस वजह से जब उत्तराखंड रजत जयंती वर्ष मना रहा होगा, तब वर्ष 2025 में उत्तराखंड अलग स्वरूप में नजर आएगा.

संकल्प पूरा हुआ

पहली बार आयेाजित हुए इनवेस्टर्स समिट 2018 के सफल आयोजन का सरकार का संकल्प तो पूरा हो गया है, लेकिन अब उद्योगों में पूंजी निवेश की उम्मीदों पर लगे पंख के जमीं पर उतरने बाकी हैं. हालांकि खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत कह रहे हैं इनवेस्टर्स समिट का असर लंबे समय में नजर आएगा. लगातार हो रहे पलायन पर सीएम का कहना है इसको जल्दबाजी में नहीं देखा जाना चाहिए. इसका असर भी आने वाले समय जरूर नजर आएगा. उत्तराखंड के बीते 18 सालों के इतिहास में यह पहला मौका था, जब सूबे में पूंजी निवेश बढ़ाने और रोजगार के अवसर खोलने पर राज्य सरकार ने इनवेस्टर्स समिट 2018 का दो दिवसीय आयोजन किया. हजारों करोड़ रुपए के पूंजी निवेश पर एमओयू होने और उद्यमियों द्वारा राज्य में उद्योग स्थापित किए जाने के भरोसे पर राज्य सरकार पूरी तरह आश्वस्त है. लेकिन जानकारी लैंड बैंक की सबसे बड़ी कमी भी मान रहे हैं.

खत्म नहीं हुई चुनौतियां

फिलहाल निर्धारित लक्ष्य से तीन गुना निवेश की संभावनाएं जुटाने में कामयाब त्रिवेंद्र सरकार खुद की पीठ जरूर थपथपा सकती है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं. निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना, किसी चैलेंज से कम नहीं होगा. लेकिन उम्मीदों से बड़ा कुछ नहीं, इन प्रस्तावों की उपलब्धि राज्य को हासिल होती है तो राज्य में नौकरियों की बहार आना तय है.

उत्तराखंड में औद्योगिक प्रगति

-राज्य गठन के दौरान राज्य में स्थापित थीं कुल 1119 छोटी औद्योगिक इकाइयां.

-जबकि बड़ी या भारी औद्योगिक इकाइयों की संख्या महज 38 ही थी.

-राज्य गठन से अब तक उत्तराखंड में बड़े उद्योगों का आंकड़ा महज 255 ही पहुंच पाया

-एमएसएमई उद्योगों की संख्या 44060 तक पहुंची.

-शुरुआत में 40 हजार करोड़ के निवेश का रखा गया था लक्ष्य.

-अब लक्ष्य से तीन गुना पूंजी निवेश पर एमओयू होना का किया गया है दावा.

उत्तराखंड निवेश के लिए आदर्श राज्य :राजनाथ

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी सोमवार को इनवेस्टर्स समिट के समापन अवसर पर शिरकत की. राज्य सरकार को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर निवेशक सम्मेलन का आयोजन काबिले तारीफ है. जिस प्रकार से युवा क्रिकेटर पृथ्वी शॉ ने शतक लगाकर अपनी शानदार शुरुआत की, ठीक वैसे ही सीएम त्रिवेन्द्र ने निवेशक सम्मेलन के जरिए उत्तराखंड में विकास की बेहतर शुरुआत की है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था किसी भी देश व प्रदेश की रीढ़ होती है. इसे मजबूत करने के लिए ज्यादा निवेश की जरूरत होती है. उत्तराखंड में पर्याप्त प्राकृतिक व मानव संसाधन हैं, स्थायी सरकार है और बेहतर लॉ-एन-ऑर्डर भी. यहां पर्यटन, एरोमा, योग, आयुष व वैलनैस में संभावनाएं हैं. दुनियाभर से लोग यहां आ सकते हैं. पीएम ने उत्तराखंड को जो स्पीरीचुअल इको जोन कहा, ठीक कहा है. यहां के वातावरण में खास प्रकार की स्पिरीचुअल वाईब्रेशन है. उत्तराखंड के लोग बड़े मन के हैं. ऐसे इनवेस्टर्स से रिवर्स माईग्रेशन जल्द ही शुरु होगा. उन्होंने विश्वास जताया कि भारत 2030 तक दुनिया की टॉप तीन अर्थव्यस्थाओं में शामिल होगा. जीएसटी भारत के लिए वरदान साबित होने जा रहा है.