- शार्ट सर्किट से गोदाम में लगी आग

- कर्मचारियों की लापरवाही से आग ने धारण किया विकराल रूप

- 11.30 बजे गोदाम में लगी आग

- 1.16 बजे फायर डिपार्टमेंट को सूचना

- 7 घंटे आग कंट्रोल करने में लगा वक्त

- 12 दमकल आग बुझाने में गाडि़यों का प्रयोग

- 10 परिवार जहरीले धुएं से हुए परेशान

- 1 करोड़ का हुआ नुकसान

- पिछले साल दिवाली पर भी लगी थी आग

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LUCKNOW: समय- करीब 11:30 बजे, स्थान- बीएन रोड कैसरबाग,

लोग अपने काम में बिजी थे. तभी अचानक एक फर्नीचर के गोदाम में आग लग गई. गोदाम में काम कर रहे लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फायर विभाग को इसकी सूचना नहीं दी क्योंकि गोदाम में फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं लगे हुए थे. उनकी लापरवाही की वजह से चंद मिनटों में आस-पास रहने वालों की जान पर बन आई. आग ने विकराल रूप धारण कर लिया. आग की लपटें देख आस-पास के लोगों में हड़कंप मच गया. किसी तरह उन्होंने वहां से भागकर अपनी जान बचाई. वहीं इलाके में कई लोगों ने दम घुटने पर घर छोड़ दिया. भयावह आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की करीब एक दर्जन गाडि़यों को बुलाया गया. सात घंटे के मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया.

फर्नीचर गोदाम में शार्ट सर्किट से लगी आग

चौक निवासी रजनीश कटियार की कैसरबाग बीएन रोड स्थित निशांत सिनेमा के पास मां दुर्गा फर्नीचर के नाम से शॉप है. कुछ दूरी पर ही उनका कैसरबाग के चौलक्खी में फर्नीचर का गोदाम है. बेसमेंट में बने गोदाम में काफी मात्रा में फर्नीचर रखा था. चीफ फायर अफसर विजय कुमार सिंह ने बताया कि गोदाम में सुबह करीब 11.30 बजे शार्ट सर्किट से आग लग गई. पहले तो गोदाम में काम करने वाले कर्मचारियों ने मालिक को सूचना दी और खुद ही आग बुझाने का प्रयास करते रहे. गोदाम में रखे फर्नीचर से आग ने भीषण रूप ले लिया तो उन्होंने फायर विभाग को दोपहर 1.16 बजे सूचना दी. हजरतगंज और चौक समेत आस-पास के कई फायर स्टेशन के दमकल की गाड़ी ने मौके पर पहुंच कर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया.

7 घंटे बाद कंट्रोल हुई आग

सीएफओ के अनुसार दोपहर में डेढ़ बजे से फायर की गाडि़यों ने आग बुझाने का प्रयास किया जो शाम 7 बजे तक चलता रहा. आग भड़कने की मुख्य वजह लकड़ी और ज्वलनशील मैटेरियल बताया जा रहा है, जिसके चलते उस पर पूरी तरह काबू करने में लंबा समय लग गया. जिस जगह पर फर्नीचर गोदाम था वह गली इतनी सकरी थी कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी अंदर नहीं पहुंच सकती थी, जिसके चलते भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.

गोदाम में नहीं थे फायर सेफ्टी मानक

गोदाम में किसी तरह के फायर सेफ्टी मानक नहीं थे. वहीं आग की घटना को पहले दो घंटे तक छिपाने का भी प्रयास किया गया. इसी गोदाम में दिवाली के दिन भी आग लगी थी, जिसके चलते उन्होंने फायर सेफ्टी उपकरण लगाने के निर्देश अक्टूबर माह में फायर डिपार्टमेंट ने दिए थे.

दस परिवार दिन पर हलकान

गोदाम के पीछे हिस्से में रिहायशी कॉलोनी है, जिसमें एक डॉक्टर का क्लीनिक है. आग लगने के बाद जहरीला धुआं कॉलोनी के मकानों में फैल गया. गोदाम से सटे डॉ. शांत राम शर्मा का क्लीनिक है. उसी बिल्डिंग के सेकंड फ्लोर पर राहुल किराए पर रहता है. आग की लपटों उसके हिस्से में भी पहुंच गई और उसका कुछ सामान जल गया. कॉलोनी में रहने वाले सत्यपाल व विनोद सांस के मरीज हैं और जहरीले धुएं के चलते उन्हें सास लेने में काफी तकलीफ होनी लगी. बच्चे, बुजुर्ग सभी कॉलोनी निकलकर बाहर आए और दिन भर वह अपनी जान सुरक्षित करने के लिए रोड पर मौजूद रहे.