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PATNA : लोकसभा चुनाव के पहले चरण में बिहार के चार जिले में 11 अप्रैल को मतदान हुआ. मतदान से ठीक पहले गया और औरंगाबाद में बम मिलने से हड़कंप मच गया. बाद में जवानों ने उसे डिफ्यूज किया. बम मिलने से एक बार सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगा है. ऐसा लग रहा है जैसे पटना सहित पूरा बिहार के ढेर पर बैठा हुआ है. वर्ष 2013 में प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी (तब प्रधानमंत्री नहीं थे) गांधी मैदान में रैली करने आए थे. उस दौरान गांधी मैदान में सीरियल बम ब्लास्ट हुआ था. हैरत की बात तो ये है कि बिहार पुलिस ने पिछले 7 साल में पटना सहित प्रदेश के अन्य जिलों में कार्रवाई की और यहां से 730 बम बरामद किया. वहीं पुलिस ने 86 हजार 320 कारतूस बरामद किया. हैरत की बात ये भी है कि शासन द्वारा अपराध को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात की जाती है लेकिन अवैध हथियारों की सप्लाई नहीं रुक रही है. पुलिस ने पिछले 7 साल में 16 हजार 994 कंट्रीमेड हथियार जब्त किया है. 643 रेगुलर हथियार जब्त किया है.

सबसे ज्यादा देसी हथियार जब्त

हथियारों को लेकर पुलिस काफी एक्टिव है. पिछले 7 साल के दौरान वर्ष 2018 में सबसे ज्यादा 3 हजार 155 देसी हथियार जब्त किया गया. वहीं 2017 में 2 हजार 623 हथियार जब्त की गई. स्थिति ये कि पुलिस पिछले 7 साल में अवैध रूप से चल रहे 239 मिनी गन फैक्ट्री के संचालकों कार्रवाई की. 2018 में पूरे बिहार में 13 मिनी गन फैक्ट्री को ध्वस्त किया गया.

वीआईपी की सुरक्षा अहम

लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान हो चुका है. पटना के दो संसदीय सीट पर 19 मई को वोटिंग है. इसकी तैयारी हर स्तर पर जारी है. चुनाव से पहले पटना में नेताओं की रैली होगी. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था कैसे बेहतर बनाया जाए. इस बार पहले से बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित अन्य सार्वजिनक स्थलों पर पुलिस की पैनी नजर है. किसी भी अनहोनी को लेकर पुलिस हर तरीके से अलर्ट है.


टाइम बम मिलने से मचा था हडंकप

दानापुर थाना क्षेत्र में जून, 2012 में टाइम बम बरामद हुआ था. दानापुर के भट्ठी एरिया में लोगों ने सड़क किनारे एक संदिग्ध पैकेट मिलने की सूचना दी थी. पुलिस ने बम निरोधक दस्ते को सूचना दी. दस्ते ने जब पैकेट खोला तो एक शक्तिशाली टाइम बम मिला. जिसमें 12 वोल्ट की एक बैटरी, डिटोनेटर सहित अमोनियम नाइट्रेट का प्रयोग किया गया था.

कॉलेजों तक पहुंचने लगा बम

राजधानी के कॉलेजों में भी आसानी से बम उपलब्ध हो जाता है. पटना यूनिवर्सिटी में इसी साल मार्च में पीयू के दो स्टूडेंट्स गुट में लड़ाई हो गई. इसके बाद दोनों ओर से बमबारी की गई. वहीं 2017 में पीयू में बम बांधते समय 4 छात्र जख्मी हो गए थे. पुलिस पीयू में बम ब्लास्ट के बाद छात्रों को गिरफ्तार करती रही लेकिन बम कहां से कैंपस में पहुंचता है कभी पता ही नहीं चल पाता है.