कानपुर। 1G से शुरु हुआ मोबाइल नेटवर्क का सफर अब 5G तक पहुंचने वाला है। आइए जानते हैं इसके अब तक के खास सफर के बारे में।

1G नेटवर्क
मोबाइल नेटवर्क में जी का आशय जनरेशन से है। 1जी मोबाइल टेलीफोनी की पहली जनरेशन यानि पहली पीढ़ी है। यह एनालॉग सिग्नल पर आधारित तकनीक थी और इसकी क्षमता बेहद ही कम थी। सबसे पहले साल 1979 में 1जी तकनीक का उपयोग किया गया था। जापान में निपॉन टेलीग्राफ ऐंड टेलीफोन कंपनी जिसे एनटीटी नाम से भी जाना जाता है ने सबसे पहले लॉन्च किया था, फिलहाल इस कंपनी का नाम है NTT DoCoMo। आपने भारत में Docomo टेल्‍को का नाम सुना होगा, जो कि NTT DoCoMo का ही एक उपक्रम रहा है।

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2G नेटवर्क
पहली बार 1991 में मोबाइल के 2जी नेटवर्क का विकास किया गया। 1जी जहां एनालॉग नेटवर्क था, वहीं 2जी में डिजिटल सिग्नल का उपयोग किया गया। 2जी के लिए फिनलैंड में जीएसएम आधारित मोबाइल तकनीक शुरु हुई थी। वहीं यूएस में सीडीएमए का प्रयोग किया गया। कॉलिंग के साथ यह डाटा के लिए उपयोग किया जा सकता था, लेकिन इसकी क्षमता काफी कम थी। भारत में ऐसे नेटवर्क की शुरुआत 2.5 जी से हुई था। 1995 में भारत में पहली टेलीफोन लाइन कोलकाता और डायमंड हार्बर के बीच शुरु हुई थी और 1995 में पहली मोबाइल सेवा भी यहीं से बहाल हुई थी। भारत में कॉलिंग और एवरेज क्‍वालिटी मोबाइल इंटरनेट के लिए 2.5जी नेटवर्क का लोगों को काफी समय तक इस्‍तेमाल किया।

3G नेटवर्क
साल 2000 के बाद 3जी नेटवर्क की शुरुआत हुई। इसके लिए आइटीयू (इंटरनेशनल टेलिकम्युनिकेशन यूनियन) ने आइएमटी 2000 नाम से इसका स्टैंडर्ड सेट किया। हालांकि जापानी कंपनी एनटीटी डोकोमो ने प्री-कॉमर्शियल सर्विस लॉन्च कर दी थी, लेकिन वर्ष 2001 में इसे आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया गया। 3जी नेटवर्क इंटरनेट डाटा और कॉल दोनों के लिए था। इसमें एचएसडीपीए, एचएसपीए, एचएचपीए+ और एचएचएसपीए टर्बो 3जी के ही स्टैंडर्ड के हैं। इसकी अधिकतम डाटा क्षमता 42 एमबीपीएस तक की है।

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4G नेटवर्क
4जी तकनीक की शुरुआत साल 2007 में हुई, लेकिन उस वक्त यह वाईमैक्स नेटवर्क पर टेस्ट किया गया था। इसे आइटीयू ने तैयार नहीं किया था। वहीं साल 2008 में आइटीयू ने 4जी के लिए आइएमटी एडवांस तकनीक की घोषणा कर दी, जो जीएसएम आधारित 4जी तकनीक थी। इसके बाद से इसमें जबरदस्‍त विकास हुआ। 4जी के लिए एफडीडी और टीडीडी सहित दो तकनीकें इस्‍तेमाल की जाती हैं। भारत में दोनों तकनीकों का उपयोग होता है। भारत में सबसे पहले भारती एयरटेल ने 4जी सर्विस शुरु की थी।

5G नेटवर्क
5जी सेल्युलर मोबाइल सर्विस का 5वां वर्जन है, जो अपने सुपर फास्ट डाटा सर्विस के लिए जाना जात है। हालांकि 4जी आने के बाद से ही 5जी की चर्चा होने लगी थी, लेकिन इस क्षेत्र में तेज प्रगति साल 2017 के बाद ही देखने को मिली। दुनिया मे मोबाइल टेलीफोनी नेटवर्क तकनीक का विकास करने वाली संस्था आइटीयू (इंटरनेशनल टेलिकम्युनिकेशन यूनियन) ने 3जीपीपी (थर्ड जेनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट) के तहत दिसंबर 2017 में 5जी के लिए मानक की घोषणा थी। संस्था ने इस तकनीकी का नाम आइटीयू आइएमटी—2020 (इंटरनेशनल मोबाइल टेलिकम्युनिकेशन-2020) का नाम दिया है और साथ ही इसके लिए लोगो की भी घोषणा की गई। 5जी के लिए मानक तय होने के बाद इसके लिए टावर्स और स्पेक्ट्रम सहित सभी तरह के इक्विपमेंट निर्माण की दिशा में अहम काम शुरु हुए। दुनिया की प्रमुख मोबाइल डिवाइस कंपनियों जैसे सोनी, नोकिया, सैमसंग, एलजी, हुवावे और जेडटीई ने 2019 तक अपने 5जी फोन लॉन्च करने की दिशा में काम शुरु कर दिया है। बता दें कि पूरी दुनिया में सबसे पहले अमेरिकी कंपनी वेरिजॉन ने ट्रायल के तौर पर 5जी नेटवर्क की शुरुआत अक्‍टूबर महीने में कर दी है। हालांकि यह ट्रायल चुनिंदा अमेरिकी शहरों तक ही सिमटा हुआ है।

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