जांच के बाद भी 200 सफाई कर्मचारियों को जारी हुआ वेतन

नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने शुरू कराया कर्मचारियों का सत्यापन

Meerut. छह माह पहले नगर निगम में हुई 200 से अधिक सफाई कर्मचारियों की भर्ती के मामले में आला अधिकारियों का भ्रष्टाचार परत दर परत खुलता जा रहा है. पहले फर्जी तौर पर कागजों में 200 सफाई कर्मचारियों की भर्ती गई और फिर इनका वेतन भी जारी कर दिया गया. इस तरह करीब 30 लाख से अधिक के गड़बड़झाले को अमलीजामा पहनाया गया. हालांकि मामला सामने आने पर निगम के पार्षदों ने हंगामा कर भर्ती को निरस्त करने की मांग उठानी शुरू कर दी है.

भर्तियां जांच के दायरे में

नगर निगम में इन दिनों स्वास्थ्य अनुभाग में 200 फर्जी सफाई कर्मचारियों का मामला गर्माया हुआ है. जिन सफाई कर्मचारियों को वार्डो में सफाई के लिए भर्ती किया गया था. असल में उनकी निगम में कभी भर्ती हुई ही नहीं. सिर्फ निगम के रिकार्ड में ही उनकी वार्डो में नियुक्तियां दिखा दी गई. इस मामले में तीन माह पहले शिकायत होने पर मेयर की तरफ से भर्ती निरस्त करने की मांग की गई थी और तभी से यह भर्तियां जांच के दायरे में हैं.

कागज पर ड्यूटी

200 अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों में से हर एक का 7500 रुपये प्रतिमाह वेतन तय किया गया था, जिसकी फाइलों में बकायदा एंट्री भी की गई. इस गड़बडी का पता तब चला, जब ये कर्मचारी किसी भी वार्ड में ड्यूटी पर नहीं पहुंचे.

नाम में गड़बड़ी की सूची

दरअसल, पूरा मामला उस समय पकड़ में आया, जब वेतन रिलीज करने के लिए कर्मचारियों की सूची नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पास पहुंची. वेतन तभी रिलीज हो सकता है, जब नगर स्वास्थ्य अधिकारी इस पर अपने साइन कर दें. हालांकि नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने इस माह आई कर्मचारियों की सूची वापस भेज दी. कारण था सूची में कर्मचारियों के नाम बदले हुए थे.

फर्जी मिले नाम

संबंधित पीआरओ से जब इन सफाई कर्मचारियों के बारे में जानकारी ली गई तो सभी नाम फर्जी मिले. आनन-फानन में पीआरओ ने छह बार नाम बदलकर सूची नगर स्वास्थ्य अधिकारी को दोबारा भेज दी, लेकिन इस बार भी नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने सूची पर हस्ताक्षर नहीं किए. नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवर सेन के मुताबिक जिन कर्मचारियों के वेतन की सूची तैयार की गई है, पहले उन सभी का सत्यापन कराया जा रहा है. सत्यापन होने के बाद ही उनका वेतन जारी होगा. फिलहाल मामले की जांच चल रही है.