- अपनी लाइफ साइकल पूरी कर चुकी हैं जिले की 21 सरकारी एंबुलेंस

- ऑडिट टीम के हस्तक्षेप के बाद भी नहीं किया गया चेंज

GORAKHPUR: पहले ही सरकारी एंबुलेंस का टोटा झेल रही गोरखपुर सिटी में इस व्यवस्था का और भी बदतर हाल हो सकता है. यहां रन कर रहीं 82 सरकारी एंबुलेंस में से 21 ऐसी हैं जो अपनी लाइफ साइकल पूरी कर चुकी हैं. बावजूद इसके बिल्कुल जर्जर और यूजलेस हो चुकीं इन एंबुलेंस को रिप्लेस कराने की जगह जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. ये हाल तब जब आए दिन जर्जर एंबुलेंस कहीं न कहीं हादसे का शिकार या फिर बीच रास्ते ही बंद हो जा रही हैं. सूत्रों की मानें तो ये एंबुलेंस साढ़े तीन लाख किलोमीटर से अधिक अवधि पूरी कर चुकी हैं. नियम के अनुसार इन गाडि़यों की लाइफ साइकल इतनी ही होती है. इसके बाद गाडि़यों को यूजलेस घोषित किया जा सकता है.

स्टेयरिंग तक ठीक से नहीं करते काम

102 और 108 नंबर एंबुलेंस सेवा के चालकों की मानें तो पुरानी हो चुकी एंबुलेंस के स्टेयरिंग भी ठीक से काम नहीं करते हैं. अगर अचानक ब्रेक लगाना पड़ जाए तो बहुत मुश्किल हो जाती है. इसकी शिकायत दर्ज कराई जाती है लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं देते. इतना ही नहीं इमरजेंसी के दौरान ये गाडि़यां मरम्मत के अभाव में जहां-तहां खड़ी हो जाती हैं. हालांकि संबंधित विभाग का दावा है कि एंबुलेंस के खराब होने के तत्काल बाद खोराबार स्थित वर्कशॉप में मरम्मत कराई जाती है.

डेली दो दर्जन से अधिक इमरजेंसी कॉल

सूत्रों की मानें तो एक दिन में 102 और 108 एंबुलेंस सेवा पर करीब दो दर्जन से ज्यादा कॉल प्रसव पीड़ा से परेशान महिला व हादसे में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए आते हैं. ब्लॉक में भी यही स्थिति रहती है. 108 व 102 नंबर की एंबुलेंस को आए चार से पांच साल हो गए लेकिन इनमें भी बड़े हूटर तक नहीं लगाए गए. इससे भी चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

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कभी-कभी हॉर्न भी नहीं करते काम

पुरानी हो चुकी एंबुलेंस के हॉर्न तक कई बार काम नहीं करते हैं. कई गाडि़यों के पीछे लाइट तक नहीं हैं. इनके फिटनेस की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है. इन गाडि़यों की स्थिति देखते हुए मरीज भी प्राइवेट एंबुलेंस को हायर करने में ही खुद की भलाई समझते हैं.

कई में फ‌र्स्ट एड किट तक नहीं

सूत्रों की मानें तो कई एंबुलेंस में फ‌र्स्ट एड किट तक नहीं हैं. हादसे में घायल मरीज को अगर ब्लीडिंग हो रही है तो उसे रोकने के लिए कॉटन तक उपलब्ध नहीं हो पाता. साथ ही रेफर मरीज की ग्लूकोज पाइप में कोई कमी आ जाए या ड्रिप की जरूरत पड़ जाए तो वह भी एंबुलेंस में मौजूद नहीं मिलती.

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बैकअप में चल रही आंध्रा की रिजेक्ट एंबुलेंस

वहीं, सूत्रों की मानें तो बैकअप में जो एक एंबुलेंस चलाई जा रही है वह आंध्र प्रदेश की रिजेक्ट एंबुलेंस हैं. इसे जुगाड़ से फिटनेस कराकर चलया जा रहा है. विभागीय सूत्रों की मानें तो केंद्र की टीम आने के बाद पुरानी एंबुलेंस को पेंट पॉलिश करा ओके दिखा दिया गया था.

एंबुलेंस संख्या लाइफ साइकल पूरी कर चुकीं एंबुलेंस

102 50 11

108 30 10

- नई एएलएस एंबुलेंस की संख्या - 2

वर्जन

नई एंबुलेंस के लिए कई बार शासन को पत्र लिखा गया है. साथ ही कुछ रोज पहले इसके लिए रिमांइडर भी भेजा गया है. जल्द ही नई एंबुलेंस मिल जाएगी.

- डॉ. श्रीकांत तिवारी, सीएमओ