- उन बिंदुओं पर करना होगा फोकस, जिनमें पिछले सर्वेक्षण में पिछड़े

- अभी तक टॉयलेट्स और कूड़ा कलेक्शन की स्थिति बेहद खराब

abhishekmishra@inext.co.in

LUCKNOW: बस चार महीने बाद एक बार फिर से अग्निपरीक्षा शुरू होने जा रही है. इस अग्निपरीक्षा का नाम है स्वच्छता सर्वेक्षण 2019. पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की रैकिंग जरूर सुधरी है, लेकिन अभी तक टॉप 10 में आना एक सपना सरीखा ही है. अभी तक निगम की ओर से उन बिंदुओं पर खास फोकस नहीं किया जा रहा है, जिनकी वजह से शहर टॉप 10 तो दूर, टॉप 100 में भी नहीं आ सका था.

4 जनवरी से सर्वेक्षण

जानकारी के अनुसार, स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के लिए चार जनवरी से सर्वे शुरू होने जा रहा है. इस बार सर्वे 25 दिन के लिए होगा. मतलब चार जनवरी से शुरू होने सर्वे का कार्य 28 जनवरी तक पूर्ण कर लिया जाएगा. हालांकि पिछले सर्वेक्षण में भी यही टाइमलाइन आई थी, लेकिन बाद में डेट बढ़ा दी गई थी.

पिछला सर्वेक्षण एक नजर में

4 हजार अंकों की कुल मार्किग

1400 अंक म्यूनिसिपल डॉक्यूमेंटेशन के

1200 अंक डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन के

1400 अंक सिटीजन फीडबैक के

माइनस मार्किग भी

पिछले सर्वेक्षण की तरह इस बार भी माइनस मार्किग होगी. जिससे साफ है कि अगर निगम की ओर से किसी भी बिंदु में तैयारी पूर्ण नहीं की गई तो उसके अंक कटना तय हैं. सर्वेक्षण 2018 में निगम को टॉयलेट्स और कचरा कलेक्शन संबंधी बिंदु में खासा झटका लगा था. इसकी वजह से शहर की रैंकिंग पर असर पड़ा.

खामियां जस की तस

1-टॉयलेट- सर्वेक्षण 18 के दौरान निगम को करीब 17 हजार टॉयलेट्स का टारगेट मिला था. अभी तक सिर्फ 13 हजार टॉयलेट्स का ही निर्माण हुआ है. सभी 110 वार्ड ओडीएफ घोषित नहीं किए जा सके हैं.

2-डोर टू डोर कचरा कलेक्शन- इस बिंदु में भी निगम की स्थिति को बेहतर नहीं माना जा रहा है. अभी तक 55 फीसदी वार्डो से कचरा कलेक्ट नहीं हो रहा है. जिसकी वजह से जनता परेशान हो रही है.

3-डस्टबिन-इस बिंदु के तहत निगम की ओर से सभी प्रमुख स्थानों, बाजारों में डस्टबिन की व्यवस्था की जानी थी, सिर्फ 50 प्रतिशत प्रयास ही हुआ है.

4-सफाई-इस बिंदु के तहत खासा प्रयास तो हुआ है, लेकिन पुराने लखनऊ के तहत आने वाले कई इलाकों में नियमित रूप से सफाई नहीं होती है. इस तरफ ध्यान देना होगा.

लखनऊ को बनाना है नंबर वन

स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 को ध्यान में रखते हुए अभी से ही निगम की ओर से कवायद शुरू कर दी गई है. निगम अधिकारियों की ओर से आश्वासन दिया जा रहा है कि इस बार सर्वेक्षण में शहर को नंबर वन बनाना है. हालांकि जब तक उपरोक्त चार बिंदुओं पर शत प्रतिशत कार्य नहीं होगा, तब तक नंबर एक का सपना देखना कल्पना मात्र है.

115 रैंकिंग

स्वच्छता सर्वेक्षण 2017 में जहां शहर की रैंकिंग 269 थी, वहीं सर्वेक्षण 2018 में सुधार हुआ और रैंकिंग 115 पहुंच गई. अगर चार बिंदुओं पर सही से होमवर्क कर लिया जाए तो निश्चित रूप से शहर टॉप 10 में शामिल हो सकता है.

वर्जन

हमारी ओर से स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. सर्वेक्षण से पहले ही टॉयलेट्स का शत प्रतिशत निर्माण करा लिया जाएगा साथ ही हर घर से कूड़ा उठने लगेगा.

संयुक्ता भाटिया, मेयर

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स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में टॉप 10 में जगह बनाने को क्या कदम उठाने चाहिये?