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RANCHI: कांके के अरसंडे में सात फैमिली मेंबर्स के मर्डर व सुसाइड मामले में सभी शवों का अंतिम संस्कार बुधवार को कर दिया गया. लेकिन, इसमें सच्चिदानंद झा की बेटी या दामाद कोई नहीं पहुंचे. बल्कि दिल्ली-कोलकाता में रहने वाले बचपन के मित्र व गोतिया में चचेरे भाई, उनके बेटे व दामाद ने मुखाग्निी देकर सच्चिदानंद झा के सभी सात फैमिली मेंबर्स को इस नश्वर संसार से मुक्ति दिलाई. शाम में सातों शवों को हरमू मुक्तिधाम में सच्चिदानंद सिंह के चचेरे भाई कृष्णानंद झा, मुंगेर से उमेश झा, कोलकाता से कृष्णानंद झा के बेटे नीरज झा, दामाद राजीव पाठक समेत कई लोगों ने शवों का अंतिम संस्कार किया.

आखिर इनका क्या कसूर था

इससे पहले रांची पहुंचने के बाद इनलोगों ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया. पुलिस इन्हें पहले रिम्स के शवगृह ले गई. वहां सभी शवों की पहचान कराई गई. इसके बाद पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए वाहन से सभी शवों को हरमू मुक्तिधाम ले जाया गया, जहां दाह-संस्कार किया गया. यहां छोटे बच्चों को मुखाग्नि देते वक्त सभी लोगों का दिल पसीज गया. कहने लगे कि आखिर इनका क्या कसूर था.

48 घंटे बाद पहुंचे रिश्तेदार
बेटी संध्या के इनकार करने के बाद 48 घंटे रिम्स में पड़े शवों को लेने पहुंचे रिश्तेदार पहुंचे. परिजनों ने जैसे ही शव को देखा सभी शोक में डूब गए. कहा कि आर्थिक परेशानी की वजह से ही पूरे परिवार ने मौत को गले लगाया है. वहीं, परिजनों ने बताया कि अंतिम संस्कार की विधि में मिथिला मंच, भाजपा महानगर के लोगों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई.

अरसंडे में पड़ोसियों को लग रहा डर
दीपक के पड़ोसियों को अब डर लगने लगा है. उनका कहना है कि पहले उस कमरे की रौशनी से नहा उठता था, लेकिन अब वह भूतिया टाइप का लगने लगा है. पड़ोसी उषा पांडेय व उसकी देवरानी भी डर रही है. क्योंकि अब उस घर में केवल वे दोनों की बच गए हैं. ऐसे में उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वे करें तो क्या करें?