दस साल पहले 11 सितंबर 2001 को अमेरिका terrorism की आग में जल उठा था. अमेरिका ने इससे बड़ा सबक लिया. उसने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी अभियान चलाया और ओसामा को मार गिराया. 2001 में ही 13 दिसंबर को भारतीय संसद पर attack हुआ. हमले का mastermind अफजल गुरु पकड़ा गया था, पर आज भी फांसी नहीं हो सकी है. भारत ने इसके बाद कई terrorist attacks झेले. आखिर क्यों? क्या ये willpower की कमी है?

american 9/11 vs indian 26/11

American strategy 
अमेरिका में 9/11 के बाद तुरंत एंटी टेररिज्म मिशन शुरू किया गया. तमाम सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशंस फॉर्म की गईं. अमेरिका ने ‘वॉर अगेंस्ट टेररिज्म’ चलाया. अलकायदा व तालिबान को नेस्तनाबूद करने के लिए सॉलिड प्लान्स बनाए. अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ लड़ाई छेड़ी जो अभी जारी है.

US objectives
जॉर्ज डब्लू बुश एडमिनिस्टे्रशन ने 9/11 के बाद कुछ ऑब्जेक्टिव्स सेट किए. इसके तहत ओसामा बिन लादेन, अबू मोसाद अल-जवाहिरी जैसे आतंकियों को मारना और उनके ऑर्गनाइजेशंस को खत्म करना था. इस मिशन में वे बड़े पैमाने पर सफल रहे और ओसामा के खिलाफ लंबे अभियान के बाद उसे खत्म कर दिया. अमेरिका ने तालिबान को अफगानिस्तान से उखाड़ा. अलकायदा को भी फाइनेंशियली कमजोर करने में वह कामयाब रहा है.

International mission
अमेरिका ने टेररिज्म के खिलाफ इंटरनेशनल लेवल पर वॉर छेड़ा. डिफरेंट कंट्रीज को अपने साथ मिलाया और उन्हें लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित किया. अपने देश के कमजोर राज्यों को और मजबूत बनाया ताकि वे टेररिज्म का शिकार ना हो पाएं. उसने ऐसी कंट्रीज और क्षेत्रों के खिलाफ अभियान चलाया जो टेररिज्म को पनाह देते हैं या टेररिस्ट्स को सहायता देते हैं.

To protect citizens
अमेरिका ने अपने देश के नागरिकों को सबसे ऊपर रखा. यूएस सिटीजंस और उनके अधिकारों की रक्षा करना और होमलैंड सिक्योरिटी के लिए नेशनल स्ट्रैटजी को इंप्लीमेंट करना उसकी प्रियॉरिटी रही. उसने लोगों में टेररिज्म के खिलाफ अवेयरनेस फैलाई. यूएस सिटीजंस की अब्रॉड में रक्षा के लिए और साधन जुटाए. 

कानूनी कदम
अमेरिका में 9/11 के बाद कोर्ट में लाए गए कुल 196 टेररिज्म केसेज में से 178 पर फैसला हो चुका है. करीब 3000 लोग टेररिज्म के आरोप में पकड़े गए. इनमें से 2500 से अधिक लोग कन्विक्ट हो चुके हैं. सैकड़ों टेररिस्ट्स को उसने दुनिया की सबसे खतरनाक ग्वांतनामो जेल में डाल रखा है.

Target

9/11 का प्राइम एक्यूज्ड ओसामा बिन लादेन था. अमेरिका ने तत्काल उसके खिलाफ मिशन लांच किया. अरबों डॉलर खर्च करके अफगानिस्तान में मिशन चलाया. लेटेस्ट टेक्नोलॉजीज से अपनी आर्मी को अपडेट किया और आखिरकार 2 मई 2011 को उसने ओसामा का अंत कर दिया.

Indian strategy


american 9/11 vs indian 26/11

13 सितंबर 2001 को देश की संसद पर अटैक हुआ. पांच आतंकियों ने देश की सबसे बड़ी संस्था की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए यहां गोलीबारी की. इन पांचों की पहचान पाकिस्तानी नागरिकों के तौर पर हुई. इसके बावजूद देश की सरकार कोई ऐसा कानून नहीं बना सकी जो टेररिज्म से प्रोटेक्ट कर सके. 2001 से 2011 के बीच अब तब बीसियों हमले हो चुके हैं. 26 नवंबर 2008 को टेररिस्ट्स ने मुंबई को हिला दिया. 150 से ज्यादा लोग मारे गए. इसके बाद एनआईए (नेशनल इंटेलीजेंस एजेंसी) का गठन किया गया, पर यह भी अभी तक कोई ठोस रिजल्ट नहीं दे पाई है. एनआईए के साथ स्टेट एजेंसीज के को-ऑर्डिनेशन में भी कमी दिखी है. 13 जुलाई 2011 को मुंबई में तीन ब्लास्ट्स के बाद मुंबई एटीएस और एनआईए के मतभेद सामने आ गए थे.

Indian objectives
इंडिया ने भी हमलावरों को पहचाना. 2008 में हुए मुंबई टेररिस्ट अटैक्स का दोषी अजमल आमिर कसाब मुंबई में स्पेशल सेल में कैद है. यह भी साफ है कि मुंबई अटैक्स का मास्टरमाइंड हाफिज सईद है, पर भारत उसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठा पा रहा है. मुंबई अटैक्स के तीन साल बीत चुके हैं. अभी तक कसाब पर कोई फैसला नहीं सका है.

International mission
अमेरिका के विपरीत भारत में टेररिज्म से लड़ाई में विलपावर की कमी साफ नजर आती है. भारत में आतंकी घटनाओं में पाकिस्तान का हाथ है. इसके बावजूद भारत कोई भी मजबूत कदम नहीं उठा सका है. पाक में तमाम टेररिस्ट कैंप्स चल रहे हैं. मगर वह इसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले पा रहा है. वहीं मुंबई अटैक्स में शामिल डेविड कोलमैन हेडली और तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण में भी उसका लचर रवैया सामने आया. विकीलीक्स ने तो यहां तक खुलासा किया है कि इंडिया ने हेडली के प्रत्यर्पण की कोई कोशिश ही नहीं की. 

आम आदमी सिक्योर नहीं
आम-आदमी कैसे सेफ फील करे जब वह देश के महत्वपूर्ण संस्थानों ही सेफ नहीं हैं. हालिया ब्लास्ट दिल्ली हाईकोर्ट के गेट पर हुआ. यह एक हाई-प्रोफाइल इलाका है और प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से लेकर संसद भवन तक की डिस्टैंस काफी कम है.

Target
संसद हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु पकड़ा गया. कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई, पर मर्सी पेटीशन डालकर अफजल बचा हुआ है. हाल में तो यह भी खुलासा हुआ था कि होम मिनिस्ट्री ने बहुत दिनों तक उसकी फाइल दबाए रखी. उसे छुड़ाने के नाम पर अब तक तीन बार टेररिस्ट अटैक्स हो चुके हैं.

International News inextlive from World News Desk