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RANCHI : एड्स के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। एचआईवी पीडि़त महिलाओं की कोख से 98 परसेंट बच्चे स्वस्थ पैदा हुए हैं। इन न्यू बार्न बेबी में एचआईवी के वायरस फैलने में कमी आई है। मेडिकल साइंस के जरिये ये बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। इसका खुलासा झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी के आंकड़ों से खुलासा हुआ है। सोसाइटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मृत्युंजय कुमार वर्णवाल के मुताबिक प्रीवेंशन ऑफ पेरेंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन पीपीपीसीटी के कार्यक्रम के तहत चल रहे कार्यक्रम का नतीजा है कि एचआईवी मां से पैदा हो रहे बच्चों में इस खतरनाक वायरस के फैलने से बचाने में कामयाबी मिल रही है।

201 में से सिर्फ 4 में आया वायरस

2018-19 के आंकड़ों के अनुसार रांची सहित पूरे राज्य में 201 प्रेगनेंट महिलाओं को एचआईवी पॉजिटिव पाया गया था। ये सभी महिलाएं रांची के अलावा झारखंड के अलग-अलग जिलों की रहने वाली हैं। डिलिवरी के बाद 196 बच्चों में एचआईवी के लक्षण नहीं दिखे, यानी 98 प्रतिशत ऐसे बच्चे पैदा हुए जिनमें मां का एचआईवी वायरस उनमें नहीं आया। ये सभी बच्चे स्वस्थ हैं, जबकि गर्भ में पल रहा बच्चा अपने पोषण के लिए मां पर ही निर्भर होता है। और सिर्फ चार मां ऐसी रहीं जिनसे पैदा हुए बच्चों में वायरस ट्रांसमिट कर गया।

पीपीटीसीटी कार्यक्रम से सफलता

झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक मृत्युंजय कुमार वर्णवाल का कहना है कि रांची सहित पूरे झारखंड में प्रिवेंशन ऑफ पेरेंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन पीपीटीसीटी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम गर्भवती महिलाओं से उनके बच्चों में एचआईवी के वायरस को रोकने के लिए शुरू किया गया है

1,689 में पाया एड्स पॉजिटिव

2018 -19 के आंकड़ों के अनुसार पूरे स्टेट में 1,689 लोगों में एड्स पॉजिटिव पाया गया है। मृत्युंजय कुमार वर्णवाल बताते हैं कि इसके अलावा भी जिन नए लोगों में एचआईवी पॉजिटिव रिपोर्ट पायी गई है, उनका भी इलाज शुरू हो गया है। झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी की संस्था जहां जहां काम कर रही है वहां से इन्हें सपोर्ट भी मिलना शुरू हो गया है।

कई लेवल पर हो रही पहचान

मृत्युंजय कुमार बताते हैं कि झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी द्वारा कई लेवल से एड्स के मरीजों की पहचान की जा रही है और उनका इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के छह मुख्य काम हैं। बेसिक सर्विसेज डिवीजन, ब्लड ट्रांसफ्यूजन सर्विसेज, टारगेटेड इंटरवेंशन, देखभाल सहायता उपचार, निगरानी मूल्यांकन तथा सूचना शिक्षा और संचार शामिल हैं।

बढ़ाया जाएगा सेंटर

झारखंड में अभी 64 आईसीटीसी सेंटर काम कर रहे हैं। जहां लोगों की शुरुआती जांच कर इलाज होता है। कई सेंटर लोगों से बहुत दूर हैं, जिसके कारण ऐसे मरीजों को पहुंचने में परेशानी होती है। परियोजना निदेशक बताते हैं कि राज्य में 108 आईसीटीसी बनाने की तैयारी चल रही है ताकि लोगों को अपने नजदीक के सेंटर पर ही इलाज मिल सके। अभी 32 टार्गेट इंटरवेंशन सेंटर चल रहे हैं जहां लोगों को एड्स के प्रति जागरूक होने के लिएं सारी सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं।

सफलता की कहानी परियोजना निदेशक की जुबानी

सवाल- एक साल में कितने एड्स के नए मरीज आए।

जवाब- 2018-19 में 1689 लोगों में एड्स पॉजिटिव पाया गया है। इसके अलावा 201 प्रेगनेंट महिलाओं में भी एड्स के वायरस पाए गए।

सवाल- कितने बच्चों में वायरस ट्रांसमिट कर गया।

जवाब - पूरे राज्य में हजारों महिलाओं में एड्स की जांच की गई, जिसमें 201 की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली, महिलाओं का ट्रीटमेंट किया गया और मात्र चार बच्चों में वायरस ट्रांसमीट कर गया है।

सवाल - झारखंड एड्स कंट्रोल सोसायटी कैसे एड्स रोगियों की मदद करती है।

जवाब - इस सोसायटी के 64 आईसीटीसी सेंटर हैं जहां शुरुआती जांच होती है। 32 टार्गेट इंटरवेंशन सेंटर हैं। जहां एड्स मरीजों को हर तरह की फैसिलिटी दी जाती है। राज्य में 8 एआरटी सेंटर हैं जहां से फ्री में दवाइयां मिलती हैं। 1097 कॉल सेंटर हैं जहां कोई भी फोन करके हर जानकारी ले सकता है।