न्यूयॉर्क में 33 साल पहले 25 मई 1979 के दिन सोहो के इलाके में इटन पेट्ज नाम का एक छह साल का बच्चा अपने घर से स्कूल जाने के लिए बस पकड़ने अकेले निकला था और फिर वह गायब हो गया. इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला.

कई साल तक जांच के बाद पुलिस ने भी इस मामले को बंद कर दिया. वर्ष 2001 में एटन पेट्ज़ को कानूनी तौर पर मृत घोषित कर दिया गया था. लेकिन आज भी पुलिस के पास उसकी मौत का कोई सुबूत नहीं हैं.

अब अमरीकी खुफिया एजेंसी एफ़बीआई और पुलिस ने फिर से जांच शुरु करते हुए मैनहैटन के एक घर में खुदाई का काम शुरु किया है. एक खोजी कुत्ते द्वारा कुछ संकेत दिए जाने के बाद पुलिस को संदेह है कि पेट्ज की लाश उस घर में मिल सकती है.

'तहखाने के फर्श को तोड़ेंगे'

पुलिस विभाग के प्रवक्ता पॉल ब्राउन के अनुसार, "जब 33 साल पहले ये जाँच शुरु हुई थी तो इस घर को भी जांच का हिस्सा बनाया गया था. अब कुछ नए संकेत मिले हैं जिनके कारण हम अत्याधुनिक तकनीक से इस घर के तहखाने की गहन छानबीन करना चाहते हैं. हमे उम्मीद है कि यहां से उस बच्चे की लाश या अवशेष या फिर बच्चे के कपड़े आदि मिल सकते हैं. हम इस घर के तहखाने में फ़र्श को तोड़कर उसके नीचे की मिट्टी की जांच करना चाहते हैं.”

यह मामला इतना चर्चा में रहा था कि उस समय के अमरीकी राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन ने एटन पेट्ज़ की गुमशुदगी के दिन यानी 25 मई को राष्ट्रीय स्तर पर गुमशुदा बच्चों का दिवस करार दे दिया था.

न्यूयॉर्क में गुरुवार को एक विशेष खोजी कुत्ते ने इस संदिग्ध घर के तहखाने में मानव अवशेष होने के संकेत दिए थे जिसके बाद वहाँ खुदाई और छानबीन हो रही है. तेरह फीट चौड़े और 62 फीट लंबे इस तहखाने को पूरी तरह उखाड़कर तलाशी का काम कई दिन तक जारी रहेगा.

बीबीसी से बात करते हुए एफबीआई के प्रवक्ता टिम फ़्लैनैली ने कहा, “एफबीआई और न्यूयॉर्क पुलिस इस मामले की जांच में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. हम छोटे से छोटे संदिग्ध हिस्से को टेक्नालाजी का प्रयोग कर बहुत बारीकी से जांचेंगे जिससे यह पता लगाया जा सके कि इस जगह उस बच्चे की लाश या उसके अवशेष तो नहीं हैं.” वर्ष 1979 में हुई इस घटना ने पूरे देश में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा कर दी थीं.

'हमारे जीने का ढंग ही बदल दिया'

मैनहैटन की एक अधेड़ उम्र की महिला ज्यूडिथ जिन्हें 33 साल पहले हुई ये घटना अच्छे से याद है, कहती हैं, "इस हादसे के बाद हम लोगों में बहुत डर समा गया. उसके बाद से मोहल्ले में बच्चे सड़कों पर अकेले नहीं निकलते थे. इस हादसे ने तो हमारे जीने का ढंग ही बदल दिया.”

वो बताती हैं कि उन्होंने भी उस समय कई लोगों के साथ मिलकर इस बच्चे को ढूंढने के लिए मदद की थी और उसकी तस्वीर वाले पोस्टर जगह-जगह चिपकाए थे.

भारतीय मूल के रंदीप सिंह खुदाई वाली इमारत के पास एक दफ्तर में काम करते हैं. वे कहते हैं,“इस मामले को अब तो तीन दशक से ज़्यादा का समय हो गया है, पता नहीं इस खुदाई से क्या मिलेगा.”

लेकिन एक भारतीय मूल के अमरीकी सुरेश गोविंदराय कहते हैं, “देखिए, जितना भी समय बीत गया हो लेकिन उस बच्चे के माता पिता को कुछ तो पता चलना चाहिए न कि उनके बेटे को क्या हुआ था, वह कैसे गायब हो गया, किसने उसे गायब किया.” लेकिन बच्चे के पिता किसी से कोई बात नहीं कर रहे. केवल बस आस लगाए बैठे हैं कि उन्हें कुछ पुख्ता जानकारी मिल पाएगी.

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