- तमाम कोशिशों के बाद भी आईपीएस सुरेंद्र दास निजी जिंदगी में खड़ी हुई शक की दीवार नहीं गिरा सके

-पुलिस को बरामद सुसाइड नोट के मजमून से साफ है कि एक महिला मित्र को लेकर पत्नी सुरेंद्र पर करती थी शक

kanpur@inext.co.in

KANPUR : आईपीएस सुरेंद्र दास घरेलू कलह से पीडि़त फरियादियों की शिकायत सुनकर उनका परिवार बिखरने से बचाते थे लेकिन हालात ऐसे बने कि वह खुद घरेलू कलह का शिकार हो गए. एक शक में उनकी जान चली गई. जबकि वह खुद घरेलू झगड़े के मामलों को सुनने के बाद फरियादियों को शक दूर करने की सलाह देते थे. अपनी सलाह और काउंसिलिंग के जरिए वह शक को दूर कर कई दंपतियों के परिवार को टूटने से बचा भी चुके थे. लेकिन, खुद के परिवार में आई शक की दीवार को वह तमाम कोशिशों के बाद भी गिरा नहीं सके. और आखिर में इस दीवार को तोड़ने के लिए उन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी. एक होनहार, मेहनती आईपीएस का सफर शुरू होते ही खत्म हो गया.

आई एम नॉट लॉयर, आई लव यू

बताया जा रहा है कि आईपीएस सुरेंद्र और उनकी पत्नी के बीच खड़ी हुई शक की दीवार की वजह एक महिला मित्र थी. इसकी पुष्टि खुद उनके सुसाइड नोट से हो गई है. जिसमें उन्होंने लिखा है..डियर रवीना, आई एम नॉट लॉयर. मैंने जो रिकॉर्डिग की थी, वह आपकी मां को भेजने के लिए किया था. फिर बाद में लगा कि नहीं भेजना चाहिए. कुछ हाइड (छुपाना) होता तो मैं ऐसे मोबाइल नहीं छोड़ता. मैं साइलेंट था क्योंकि मुझे सुसाइडल थॉट्स आ रहे थे. आई रियली लव यू. आई नेवर कम्प्लेन योअर फैमिली. तुम इसकी पुष्टि विजय और चंद्रभान (दोनों फॉलोवर है) से कर सकती हो. मैने उनसे सल्फास लाने के लिए बोला था. कुछ दिनों पहले मैने ब्लेड भी मंगवाई थी. आई एम नॉट प्लानिंग अगेंस्ट यू. आई एम नॉट अगेंस्ट यू. आई डिड गूगल सर्च टू, नाऊ कमिट सुसाइड. फॉर सुसाइड. .. (एक युवती का नाम) से भी पूछ सकते हो. उसे भी मेरी इस प्लानिंग (सुसाइड) को लेकर संदेह था. आई लव यू, सॉरी फार एवरीथिंग.

क्या है उस रिकॉर्र्डिग में

सुसाइड नोट के मजमून से साफ है कि सुरेंद्र दास की पत्नी डॉ. रवीना उन पर शक कर रही थीं. समझाने की हर कोशिश फेल होने पर उन्होंने खुद को सही साबित करने के लिए यह जानलेवा कदम उठाया था. इस नोट में रिकॉर्डिग और एक युवती का भी जिक्र किया गया है. उस रिकॉर्डिग में क्या था और आईपीएस ने किस युवती का जिक्र किया है, पुलिस यह पता लगा रही है. बहरहाल सुसाइड नोट से साफ हो गया कि शक ने आईपीएस की जान ले ली.

तो बच सकती थी जान

सुरेंद्र ने सुसाइड नोट में एक युवती का जिक्र किया है. यह भी लिखा है कि युवती को मेरे सुसाइड थॉटस के बारे में पता है. ऐसे में अगर वह युवती सुरेंद्र के परिजनों या अफसरों को इस बात की जानकारी दे देती तो शायद आईपीएस को बचाया जा सकता था. मगर उस युवती ने भी आईपीएस के सुसाइड थॉटस को गंभीरता से नहीं लिया.