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शहर में लगे 40 फीसदी हैंडपम्प खराब हो गए हैं. इससे तमाम मोहल्लों के लोग साफ पानी के लिए तरसते हैं. गर्मी तेज हो गई है. लेकिन पेयजल समस्या को दूर करने के ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं. सिस्टम की लापरवाही को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने पब्लिश किया. इसके बाद रीडर्स ने इसपर अपना फीडबैक दिया.

सही तरीके से बोरिंग न होने से हैंडपम्प जल्दी खराब हो जाते हैं. सम्बंधित विभाग बजट का बहाना बनाकर मेंटिनेंस से हाथ खड़े कर देते हैं. अफसरों को पब्लिक की दिक्कत समझनी चाहिए.

माधवरतन, नाटी इमली

हर बार गर्मी में पब्लिक को पानी के लिए जूझना पड़ता है. लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं नहीं रेंगती. पेयजल समस्या दूर करने के लिए गर्मी से पहले कम्प्लीट प्लान बनाने की जरूरत है.

चित्रेश त्रिपाठी, रथयात्रा

गर्मी से लोग बेहाल हैं. लेकिन हैंडपम्प और नलकूप पहले से ही खराब पड़े हैं. डिपार्टमेंट को प्रॉपर तरीके से इसके समाधान की व्यवस्था करनी चाहिए.

सोनिका गुप्ता, पांडेयपुर

विभाग बजट का बहाना कब तक बनाता रहेगा. आखिर गर्मी से पहले सिस्टम के इस झोल को दूर करने के उपाय क्यों नहीं होते. इसपर जिम्मेदार लोगों पर सवाल उठना लाजिमी है.

आकाश कुमार, सिगरा

शहर के तमाम मोहल्लों में अभी से पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है. जलनिगम और जलकल विभाग को कम्पाइल प्लान बनाकर इसका समाधान करना चाहिए.

अमित केसरी, कैंट

हैंडपम्पों की बोरिंग के साथ ही उनके रखरखाव की कारगर व्यवस्था होनी चाहिए. जिससे पब्लिक को गर्मी में पानी के लिए न तरसना पड़े. इसपर शासन-प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है.

प्रभात सिंह, लहरतारा