क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि संपूर्ण भारत में रांची की पहचान कांके से होती है. यहां रिनपास में मानसिक रोगियों का ईलाज किया जाता है. नियुक्ति नियमावली नहीं होने के कारण यहां स्थायी निदेशक, चिकित्सकों व कर्मचारियों के सैकड़ों पद खाली हैं. एक हफ्ते के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. वे मंगलवार को रांची तंत्रिका मनोचिकित्सक संस्थान (रिनपास) के 93वां स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.

110 मरीजों से शुरूआत

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 1795 ई. में मुंगेर में लुनाटिक असाइलम के नाम से 110 मरीजों के साथ इसे शुरू किया गया था. बाद में पटना होते हुए रांची में 1925 में इसे स्थापित किया गया. सीमित संसाधनों के बावजूद रिनपास का इतिहास गौरवशाली रहा है. बिहार, बंगाल व ओडिशा से भी यहां मरीज इलाज कराने आते हैं.

10 प्रतिशत लोग को मानसिक समस्या

रिनपास के निदेशक ने रिनपास की कई उपलब्धियां गिनाते हुए कहा की 2001 में यहां 16 हजार मरीजों का इलाज किया गया. वहीं वर्ष 2017 में 1 लाख मनोरोगियों का इलाज हुआ. बताया कि 10 प्रतिशत लोग आज मानसिक समस्या से जूझ रहे है. वहीं हर व्यक्ति अपने जीवनकाल में 25 प्रतिशत समय मानसिक अवसाद से गुजार रहे है. वर्ष 2020 तक डिप्रेशन की समस्या सबसे बड़ी समस्या होगी. विकासशील देशों में 20 प्रतिशत वहीं भारत में लगभग 70 प्रतिशत लोगों का मानसिक इलाज नहीं हो पा रहा है.

पुरस्कार देकर किया गया सम्मानित

इस मौके पर सर्वश्रेष्ठ महिला शाखा वार्ड तीन, सर्वश्रेष्ठ पुरुष शाखा वार्ड सात, सर्वश्रेष्ठ महिला ओटी विभाग की रोगी महिला मंजू वार्ड दो, सर्वश्रेष्ठ पुरुष ओटी विभाग के रोगी आलमगीर को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया.