अबू सलेम ने रोया चिकन न मिलने का दुखड़ा
कानपुर। मंगलवार की सुबह पुर्तगाल एंबेसी की टीम तलोजा जेल पहुंची। इस दौरान टीम के साथ भारतीय वकील सबा कुरेशी नवी मुंबई स्थित तलोजा भी जेल आई थीं। मिड डे की एक रिपोर्ट के मुताबिक टीम ने अबू सलेम से बातचीत की तो उसने जेल में रहने-खाने से लेकर अपनी हर एक परेशानी उनके सामने रखी। एेसे में बातचीत के बाद सबा कुरेशी ने बताया कि अबू का कहना है कि उसे यहां अंधेरे में रखा जाता है।बैरक में सूर्य की उचित रोशनी नहीं है। वह चिकन आदि की मांग करता है लेकिन उसे नहीं दिया जाता है।

शाकाहारी खाना खाने को मजबूर किया जाता

जेल की आेर से उसे शाकाहारी खाना खाने को मजबूर किया जाता है। यहां के खाने की क्वालिटी बहुत ही खराब है। इसके अलावा अबू सलेका शौचालय भी काफीछोटा और गंदा है और वह इसके कारण बीमार हो जाता है। उसने कर्इ बार जेल के डाॅक्टरों से अपने घुटने की परेशानी बतार्इ। इस दौरान उन लोगों ने यह मुंबर्इ में एक डाॅक्टरों को दिखाने का सुझाव दिया लेकिन पिछले एक साल से जेल अधिकारी उसे दिखाने की बजाय सिर्फ बहाना बता रहे हैं। इसके अलावा उसे अपने परिवार से भी मिलने की अनुमति नहीं है।

जेल प्रशान ने उसे आरोपों को निराधार बताया
इस संबंध में जेल एसपी सदानंद गायकवाड़ का कहना है कि हम उसे चिकन नहीं दे सकते। अगर कोई डॉक्टर हमें कैदी को अंडे मुहैया कराने के लिए कहता है, तो हम उन्हें मुहैया कराते हैं। वह कैंटीन में अंडे खरीद सकता है। इसके अलावा वह जैसी बैरक में रहता वैसे में दूसरे कैदी भी रहते हैं। इसमें खुली छत होने से ताजी हवा और सूरज की रोशनी रहती है। वह हमेशा अपने स्वास्थ्य के बारे में शिकायत करता है लेकिन डॉक्टर उसे  स्वस्थ बताते  हैं। एेसे में उन्होंने अबू सलेम के लगाए सभी आरोपों को  निराधार बताया है।

भारत ने  प्रत्यर्पण संधि नियम तोड़ दिया
वहीं इस पूरे मामले को लेकर सबा कुरेशी का कहना है भारत ने सलेम अाजीवन कारावास की सजा देकर प्रत्यर्पण संधि नियम तोड़ दिया है। भारत सरकार ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि उसे 25 से अधिक वर्षों की कारावास नहीं दी जाएगी।बतादें कि 1993 में  मुंबई सिलसिलेबार बम धमाकों को अंजाम देने के बाद से यह फरार था। एेसे में भारत  2005 में पुर्तगाल से एक संधि के तहत अबू सलेक का प्रत्यर्पण कराया था लेकिन विशेष टाडा अदालत ने उम्र कैद की सजा और 2 लाख रुपये का जुर्माना लगााया गया है।

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