561 अफसरों के खिलाफ लंबित थी जांच

150 अफसर फिलहाल पाए गए दोषी

100 से ज्यादा दोगी अफसर चार विभागों के

-कई साल से पेंडिंग चल रही जांचों में पाए गए दोषी

-गृह विभाग ने दी मंजूरी, ईओडब्ल्यू व विजिलेंस दर्ज कराएगा एफआईआर

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LUCKNOW :

लंबे वक्त से रसूख के दम पर अपने खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार की जांचों को दबवाने वाले सरकारी अफसरों के बुरे दिन शुरू होने वाले हैं. प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचारी अफसरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. ईओडब्ल्यू व विजिलेंस की संस्तुति पर गृह विभाग ने ऐसे डेढ़ सौ अफसरों के खिलाफ शिकंजा कसते हुए एफआईआर की मंजूरी दे दी है. अगले दो दिनों में मुख्य सचिव के साथ होने वाली समीक्षा बैठक के बाद अन्य भ्रष्टाचारी अफसरों पर भी शिकंजा कसे जाने की उम्मीद है.

रसूख के दम पर रोक रखी थी कार्रवाई

प्रदेश के जिन सरकारी विभागों में भ्रष्टाचारी अफसरों ने पिछली सपा और बसपा सरकारों में अपने रसूख के दम पर कानूनी शिकंजे को रोक रखा था अब उन अफसरों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. ईओडब्ल्यू व विजिलेंस ने लंबित जांचों का निस्तारण करते हुए 150 अफसरों को दोषी पाया. जिसके बाद इन दागी अफसरों के खिलाफ दोनों विंग्स ने एफआईआर के लिये संस्तुति की थी. गृह विभाग ने इन संस्तुतियों को हरी झंडी देते हुए उनकी जांच में दोषी पाए गए भ्रष्टाचारी अफसरों पर एफआईआर के आदेश दे दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि ईओडब्ल्यू व विजिलेंस जल्द ही इन दागी अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कोर्ट में उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल करेगा.

561 अफसरों के खिलाफ लंबित थी जांच

गौरतलब है कि, ऐसे 561 अफसरों के खिलाफ कार्यवाही की शिकायतें लंबित थीं. जिसके बाद से सभी विभागों के द्वारा की गई एफआईआर की संस्कृति की समीक्षा शुरू हुई. यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के द्वारा अपनी जांच में दोषी पाए डेढ़ सौ अफसरों के खिलाफ एफआईआर की संस्तुति को गृह विभाग ने मंजूरी दी है. माना जा रहा है कि 14 सितंबर को मुख्य सचिव के अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठक के बाद कुछ और बड़े भ्रष्टाचारियों पर भी एफआईआर दर्ज कराने को मंजूरी मिलेगी. उल्लेखनीय है कि गृह विभाग द्वारा एफआईआर की संस्तुति जिन डेढ़ सौ आरोपियों पर की गई है उनमें कोई नेता नहीं है. फिलहाल गृह विभाग की इस संस्तुति के बाद प्रदेश की नौकरशाही में हड़कंप मचा है.

सर्वाधिक अफसर चार विभागों के

गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक, ईओडब्ल्यू व विजिलेंस ने जांच में जिन अफसरों को दोषी पाया है, उनमें शिक्षा विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, स्थानीय निकाय व समाज कल्याण विभाग के अफसर ज्यादा हैं. बताया जा रहा है कि दागी पाए गए अफसरों में समाज कल्याण विभाग में हुए छात्रवृत्ति घोटाले में लिप्त रहे अफसरों की तादाद सर्वाधिक है.